उस दरीचे में एक कहानी है


मेरी आँखों में एक दरीचा है
उस दरीचे में एक कहानी है
है कहानी में अनगिनत चेहरे 
चेहरों पर वक़्त की निशानी है

उस कहानी में दर्द के नगमे
उस कहानी में इश्क की करवट
उस कहानी के स्याह पन्नो पर
रंज-ओ-गम और अनगिनत सलवट

सुबह के ओस की कुछ बूंदे भी
दोपहर की सुलगती आंहे भी
शाम का सुरमई तरन्नुम तो
रात की पुरसुकून बांहे भी

एक बच्चे की हंसी भी उसमें
रसमें, कसमें जवान राहों की
हार कर थक चुका बुढ़ापा भी
और तस्वीर गुम निगाहों की

मेरी आखों में एक दरीचा है
उस दरीचे में एक कहानी है
है कहानी में अनगिनत चेहरें
चेहरों पर वक़्त की निशानी है...

- प्रेम प्रदीप    

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