आडवाणी को घूरते मोदी की तस्वीर के बाद सोशल मीडिया में मचा बवाल, जानें क्या है बबाल के पीछे की असली बजह


''बीजेपी पर भारी हैं मोदी-शाह की जोड़ी, यह बात आम जनमानस में चर्चा का विषय रही है. इसी के साथ पार्टी के पितृ पुरुष लालकृष्ण आडवाणी की पार्टी में उपेक्षा चर्चा का विषय बनी हुई है. हाल में आडवाणी और मोदी की एक तस्वीर ''आडवाणी की ये मुद्रा सबसे घातक जवाब है मोदी को'' के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इसमें आडवाणी अपने दोनों हाथ जोड़ कर मोदी के सामने खड़े हैं. और मोदी अकड़ के साथ उन्हें घूर रहे दिख रहे हैं. तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया में बवाल मचा हुआ है.''
- दृष्टि सक्सेना 

Akash Nagar  द्वारा पोस्ट की गई स्वीर पर कई तरह के कमेन्ट प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. 
 कैलाश कमल उपाध्याय    लिखते हैं-
आग बने फिरते हैं इक दिन पानी ही हो जाना है,
सारी दुनिया फ़ानी है तो फ़ानी ही हो जाना है !
बड़े-बुज़ुर्गों के आगे इतना ग़ुरूर भी ठीक नहीं
एक दिन मोदी जी को भी अडवानी ही हो जाना है !

वहीं Sajjan Tamta लिख रहे हैं- ''मोदी जी, थोड़ा तो शर्म करो. आडवाणी जी जैसे व्यक्तित्व की अवहेलना करना. आडवाणी जी ने भाजपा को खड़ा करने में अपना खून पसीना बहाया है, क्या दिया भाजपा ने आडवाणी जी को. आडवाणी जी की शालीनता बहुत कुछ बयां कर गयी है.

आचार्य उमेश जोशी   लिख रहे हैं- ''हर क्षेत्र में राजनीती हावी है, वो जमाना गया जब पत्रकारिता निष्पक्ष हुआ करती थी. प्रधानमंत्री जी का नाम और कोई राजनीतिक व्यक्ति सम्बोधित करे तो कोई आश्चर्य नहीं, लेकिन आजकल पत्रकार भी देश के प्रधानमंत्री जी के नाम का सम्बोधन ऐसे कर रहे हैं, जैसे वो ही राजनीतिक विपक्षी की भूमिका में हो, जय हो..

असल में तस्वीर के पीछे की बजह यह है कि आडवाणी की पार्टी में उपेक्षा लम्बे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है, इसी का फायदा उठा कर किसी ने यह तस्वीर वायरल की है. हकीकत अलग है यह तस्वीर  हाल में 24 दिसंबर को भारत सरकार द्वारा भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान में 100 का सिक्का के लोकार्पण समारोह की है. पूरी तस्वीर यह रही. इसमें मोदी द्वारा आडवाणी की उपेक्षा, उन्हें घूरने जैसी बात नहीं है. वह भी जबाब में हाथ जोड़ कर अभिवादन कर रहे हैं.  


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