जनसम्पर्क संचालक गुप्ता ने लघु पत्र-पत्रिकाओं के पत्रकारों से पूछा अटपटा सवाल 'बताओ आप के घर में शादी होगी तो पहले आप किसे कार्ड दोगे' अब पत्रकार मैदान में


''कल कमलनाथ सरकार शपथ लेने जा रही है. इस कार्यक्रम का कवरेज के लिए लघु पत्र-पत्रिकाओं के पत्रकार पास के लिए जनसम्पर्क कार्यालय गए तो उन्हें वहां से न केवल निराशा हाथ लगी बल्कि संचालक एस.एस. गुप्ता ने तो पास दिए जाने पर उलटे पत्रकारों को ही घेरे में ले लिया. श्री गुप्ता ने बड़ा ही अटपटा जबाब दिया कि आप के घर में भी अगर शादी होगी तो पहले आप अपने रिश्तेदार मित्रों को कार्ड देंगे, उसके बाद अगर बचते हैं तो ही तो अन्य लोगों को दोगे.'' 

आज लघु व मध्यम पत्र पत्रिकाओं के संपादक व पत्रकार गण जब जनसम्पर्क आयुक्त श्री पी नरहरि जी से मिलने पहुंचे और पुष्प गुच्छ देते हुए अपनी समस्या (राज्य भवन में शपथ ग्रहण समारोह ) से अवगत कराया कि हम लघु व मध्यम पत्र पत्रिकाओं को सरकारी कार्यक्रम के कवरेज हेतु पास नहीं मिलते तो आयुक्त नरहरि जी ने आवेदन को निर्देश देते हुए जनसम्पर्क अधिकारी को फॉरवर्ड कर दिया. 

जब लघु पत्र-पत्रिकाओं के संपादक आवेदन को लेकर जनसम्पर्क अधिकारी राजेश मलिक के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि आयुक्त महोदय ने तो फारवर्ड कर दिया, लेकिन हम पहले बड़े मीडिया हाउस को देंगे. उसके बाद अगर बचते हैं, तो हम आप लोगो को देंगे. इसके बाद लघु पत्र-पत्रिकाओं के संपादक संचालक एस.एस. गुप्ता के पास पहुंचे और उन्हें यह बताया तो श्री गुप्ता ने बड़ा ही अटपटा जबाब दिया कि आप के घर में भी अगर शादी होगी तो पहले आप अपने रिश्तेदार मित्रों को कार्ड देंगे, उसके बाद अगर बचते हैं तो ही तो अन्य लोगों को दोगे. 

अब पत्रकार मैदान में 
तो क्या हम लघु पत्र पत्रिकाओं के पत्रकार यह मान लें कि विज्ञापन भी इसी नीति के द्वारा दिए जाते हैं. क्या जनसम्पर्क कार्यालय व सरकार लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ के लघु पत्र पत्रिकाओँ को आत्म हत्या करने पर विवश करना चाहती है? और क्या यह माना जाए कि वह बड़े मीडिया हाऊस के सामने नतमस्तक है? क्या जनसम्पर्क अधिकारी व सरकार नहीं जानती कि आज भी बड़े मीडिया हाउस छोटे-छोटे कस्बों तक नहीं पहुंचते. यही लघु पत्र-पत्रिका उन छोटे-छोटे कस्बों में सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाते हैं. आखिर कब तक यह छोटे पत्रकार भेदभाव का शिकार होते रहेंगे? 

लघु पत्र-पत्रिकाओं के संपादक गण का कहना है कि पत्रकार कोई छोटा नहीं होता, जनसम्पर्क अधिकारियो को हम यह बताना चाहते हैं कि उन पत्र पत्रिका का सरकुर्लेशन भले ही कम हो सकता है, लेकिन उनकी कलम की ताकत को कमजोर समझने की गलती कतई न करें. इसी बात को लेकर लघु पत्र-पत्रिकाओं के संपादक, सभी सम्मानीय पत्रकार गण कल 25 दिसंबर को दोपहर 1:30 बजे जनसंपर्क कार्यालय भोपाल पहुंच कर उक्त कृत्य के लिए उक्त अधिकारी से लघु व मध्यम पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादक पत्रकारों से सामूहिक रूप से माफी के लिए बात करेंगे. और यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो लघु पत्र-पत्रिकाओं के संपादक, पत्रकार गण आगे चलकर प्रदेश व्यापी उग्र आंदोलन करेंगे. 

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