कचैड़ा के किसानों ने भाजपा के पुतले को फांसी पर लटकाया, रुकवाया वेवसिटी का काम


अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के मौके पर किसान विरोधी भाजपा के पुतले को दी गयी फांसी

रिपोर्ट/ आकाश नागर 

''पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार वेव सिटी द्वारा प्रभावित कचैड़ा गांव में आज महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें कचैड़ा के साथ ही दुजाना, दुरियाई, इकला, इनायतपुर सहित 18 गांव के किसान शामिल हुए। गांव में धरना स्थल पर महापंचायत करने के बाद निर्णय लिया गया कि आज अटल बिहारी वाजपेई द्वारा जिस भाजपा की स्थापना किसानों के हक हकूकों के लिए की गयी थी, वही भाजपा अब किसानों के साथ सौतेला रवैया अपना रही है। इसलिये अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के मौके पर ही किसान विरोधी भाजपा के पुतले को फांसी दी गयी। ''


भाजपा के पुतले को फांसी देने के बाद उसका दहन किया गया। जहां कचैडा गांव में भाजपा के आने पर प्रतिबंध वाला बोर्ड लगा है, उसके सामने ही पुतले को फांसी दी गई और आग लगा दी गई। लोगों का आक्रोश इतने पर ही नहीं थमा, बल्कि उन्होंने स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा और स्थानीय विधायक मास्टर तेजपाल नागर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

उन्होंने कहा कि हमारे गांव को जिस सांसद द्वारा गोद लेकर अनाथ कर दिया गया है, उसको हम 2019 में करारा जवाब देंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने एकमत होकर निर्णय लिया कि गांव का, जो नाला वेव सिटी द्वारा पाट दिया गया है, उसको कब्जा लिया जाएगा। इतना कहने के बाद ही धरना स्थल पर सैकड़ों महिला एवं पुरुष गांव के बाहर बने नाले पर कब्जा लेने पहुंच गए। नाला पर कब्जा लेने के बाद वेव सिटी के डंफर और जेसीबी के ऊपर चट कर महिलाओं ने और पुरुषों ने कब्जे ले लिए। ऐसे में ग्रामीणों ने वेव सिटी के सड़क बना रहे ठेकेदारों और निर्माण कर रहे लोगो को दौड़ा-दौड़ा कर भगाया। वेव सिटी के कर्ताधर्ता किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकले। 

इसके बाद ग्रामीण काफी देर तक वेव सिटी की बनाई जा रही सड़कों पर ही धरना देकर बैठ गये। लेकिन इस दौरान वेवसिटी के प्रशासनिक अधिकारियो और पुलिस प्रशासऩ ने गाँव की और आना मुनासिब नही समझा। गौरतलब है कि  कचैडा में अब हाइटेक सिटी का विरोध तेज हो गया है। गांव कचैडा में किसानों का आंदोलन अब उग्र होता जा रहा है। किसानों का कहना है कि प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार किसानों की आवाज सुनने की जगह उसे दबाने में लगी हुई हैं। अब किसी भी कीमत पर जमीनों पर काम नहीं होने दिया जायेगा। किसानों की मांग लिखित में मांगे जाने पर ही काम शुरू होने दिया जायेगा।


उल्लेखनीय है कि 26 अक्टूबर को पुलिस की मदद से खेतों में गड्ढ़े कर दिए गए थे। विरोध करने पर किसानों पर लाठीचार्ज किया गया। 86 किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उसके बाद से ही किसान धरना दे रहे है। महिला और बच्चे भी रोज धरने पर बैठ रहे है। इस दौरान मुख्य रूप से धीरज नागर, मनोज नागर, नितिन प्रधान, प्रधान तेजसिंह, आकाश नागर पत्रकार, सुशील नागर, भूमेस नागर, प्रेम सिंह आर्य, सुन्दर सिंह,इन्द्राज, बाली,प्रेम राज,प्रवीण नागर, सुभाष, सुनील  नागर ,मुनेश देवी, संतरा देवी, महकार आदि ने भाग लिया। अब धरने को पुरे 60 दिन हो गए है। विधायक और सांसद ने अब तक सुध नहीं ली है। 

नाराज किसानों ने भाजपा नेताओं की एंट्री पर पाबंदी लगा रखी है। ऐसे में जहां भाजपा के लिए मिशन 2019 में अड़चनें आ सकती है तो वहीं दूसरी तरफ वेब सिटी के लिए किसानों की जमीनों पर कब्जा लेने का रास्ता भी अवरुद्ध हो सकता है। इसमें वेव सिटी ने प्रशासन से जो 8 महीने का समय किसानों की जमीनों पर कब्जा लेने का लिया हुआ है वह भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।

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