प्राइवेट सेक्टर 4 गुना ज्यादा भ्रष्टाचारी, फिर भी क्यों गाली देते हैं हम, सरकारी विभागों या कर्मचारियों को?




''देश की रीढ़ हैं केंद्रीय व राज्य के सरकारी संस्थान व सरकारी कर्मचारी, लेकिन हम सभी मूर्खतावश निजीकरण (PRIVATIZATION) का समर्थन करते हैं. अगर आप सरकारी की बजाय प्राइवेट सेक्टर का सपोर्ट या तारीफ करते हैं तो आप देश का भला नहीं चाहते हैं, बल्कि देश को लुटवाना चाहते हैं.''



अगर आप अरबपति नहीं हैं फिर भी ऐसे लोगों में शामिल हैं, जो कि सरकारी सेक्टर को गाली देते हैं और प्राइवेट की तारीफ करते हैं तो आपकी बुद्धि पर संदेह है, क्योंकि आप अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं.

भारत में दोनों सेक्टरों का analysis करने के बाद एक अमेरिकी एजेंसी ने ये आंकड़े दिए हैं की जहां भारत का सरकारी सेक्टर 21% CURRUPT है वहीं प्राइवेट सेक्टर 82% CURRUPT है, यह रिपोर्ट "आज तक" चैनल पर सिर्फ एक बार प्रसारित की गयी है.
असल में भारत में भृष्टाचार की जड़ ही भारत का प्राइवेट सेक्टर है और वही सरकारी तंत्र को घूस देकर, डरा धमका कर, विभागों के मंत्रियों या PM तक से सांठ गांठ करके देश को नुकसान पहुचा रहे हैं.

फिर भी आपको ज्यादातर लोग सरकारी कर्मचारियों व विभागों को गाली देते मिलेगें, और सबसे बड़ी बात ये की वही लोग इन CURRUPT धन्ना सेठों या अरबपतियों का साथ देने वाले राजनीतिज्ञों की पूजा करते मिलेगें. ऐसे लोगों की बुद्धि के स्तर को समझना ही बड़ा मुश्किल है.

आइये देखें कि हम सरकारी सेक्टर या कर्मचारियों से किन कारणों से चिढ़ते हैं-



कामचोरी  
सरकारी कर्मचारियों पर कामचोरी का आरोप जन्मजात है, यानि कि नियुक्ति के पहले दिन से ही सरकारी कर्मचारी कामचोर कहलाता है, लेकिन अगर आपने कभी मकान बनवाया हो तो आपको पता होगा की एक दिहाड़ी मजदूर भी कितनी कामचोरी करता है, जिससे कि परेशान होकर आज हर व्यक्ति काम ठेके पर करा रहा है, हालांकि ठेकेदार से भी काम को लेकर मालिक की झड़प होती रहती है. यानि कि कामचोरी इंसान की एक मूल प्रव्रत्ति है, जो कि सरकारी या प्राइवेट दोनो कर्मियों में पायी जाती है.

हां इस प्रवृत्ति को control करने के लिए प्राइवेट सेक्टर में अलग से प्रलोभन दिए जाते हैं, जबकि सरकारी संस्थानों में tuf rules regulations के कारण कुछ अलग से नहीं दिया जा सकता.

कम काम के ज्यादा दाम
हममें से ज्यादातर लोग ये कहते हैं कि सरकारी लोगों की सेलरी ज्यादा है.
जनाब हर व्यक्ति कम काम के ज्यादा दाम लेना चाहता है, बिना किराया कम कराये तो आप साइकिल रिक्शा भी तय नहीं करते हैं यानि कि वो भी ज्यादा दाम मांगता है, फिर चाहे मोटर मैकेनिक हो, फ्रिज AC मैकेनिक हो, सभी ज्यादा दाम मांगते है, तो फिर केवल सरकारी कर्मचारी से शिकायत क्यों?

इसके अलावा अगर आप reputed प्राइवेट सेक्टर की सेलरी देखेगें तो ICICI के गवर्नर level की सेलरी RBI के गवर्नर से पांच गुना ज्यादा है. विभिन्न देशों की तुलना में भारत के सरकारी महकमें की सेलरी काफी कम है. फिर भी हम ज्ञान कम होने के कारण सेलरी ज्यादा है की रट लगाये रहते हैं.

भारत में ऐसे लोगों की भी अधिकता है, जो कि कभी अपनी सेलरी बढ़ा कर सरकारी के बराबर करने को नहीं कहेंगे, लेकिन सरकारी की ज्यादा है, इसकी रट लगाये रहेगे, क्योंकि उनमें ज्ञान की कमी है.



रिश्वत
हम लोग ये कहते हैं कि सरकारी विभाग रिश्वत लेते हैं, सच बात है. लेकिन ये रिश्वत जाती कहाँ है, कहां कहाँ बटती है, जनाब जब पुलिस रिश्वत लेती है तो उसको टारगेट दिया जाता है कि इतनी रकम नेता जी के पास पहुचनी है. नेताओं की जेब से विभिन्न राजनीतिक पार्टीयों को चंदा भी तो भी इसी रिश्वत से जाता है. और हम जनता रिश्वत का मुख्य कारण नेताओं की तो पूजा करते हैं और सरकारी कर्मचारियों को गाली देते हैं.

इसके बाद भी अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो आप शिकायत करके उसकी नौकरी खा सकते हैं और अक्सर आपने सरकारी लोगों की नौकरी रिश्वत लेने में जाती देखी होगी या फिर अखबारों में पढ़ी होगी. यानि कि रिश्वत लेने वाला सरकारी कर्मचारी अपने भविष्य को दांव पर लगाकर रिश्वत लेता है और उसको आप कभी भी जेल भिजवा सकते हैं.

जबकि प्राइवेट कर्मचारी द्वारा में घूस मांगने पर आप उस पर कोई कार्यवाही नहीं कर सकते हैं, जैसा कि आजकल प्राइवेट स्कूल्स व अस्पताल अनाप शनाप चार्जेस लगाकर एक तरह की रिश्वत ले रहे हैं और हम लोग कुछ नहीं कर पा रहे हैं.

सरकारी महकमें को हम लोग गलत काम कराने के लिए भी देते हैं रिश्वत 
इसके अलावा भी अगर ईमानदार अधिकारी किसी ठेकेदार या नेता से रिश्वत न लेकर ईमानदारी से काम करते हैं तो उन्हें जान से मार दिया जाता है और यदि लेते हैं तो उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है.

इसीलिए केजरीवाल ने अपनी पत्नी जो की उच्च सरकारी पड़ पर कार्यरत थीं कि नौकरी छुड़वा दी, क्योंकि वे जानते थे कि उए नौकरी सबसे कठिन है और ईमानदारी के बाद भी आप जेल की सलाखों के पीछे जा सकते हैं. इसके अलावा सरकारी कर्मचारी वो लोग हैं जो की विभिन्न प्रतियोगी परीच्छाओं के द्वारा चुने जाते हैं यानि कि वो लोग अन्य लोगों से बेहतर हैं.

और हाँ, ये प्राइवेट नौकरी नहीं कि दोस्त ने कह दिया तो कल से नौकरी पर आ जाना, या पापा ने कह दिया तो बेटा कल से प्राइवेट बैंक में मैनेजर बन गया. बहुत पापड़ बेलने होते हैं. 

सरकारी कर्मचारी एक अच्छा समाज भी बनाते हैं, वे लड़ाई झगड़े से दूर रहते हैं वे समय से income tax देते हैं वे रिश्तेदारों की आर्थिक सहायता भी करते हैं. इसके अलावा 50000 सेलरी होने पर 30000 में घर का खर्च चला कर 20000 PF कटवाते हैं और इसी सेविंग्स के बल पर विश्व आर्थिक मंदी के दौर में भी भारत की अर्थव्यवस्था चुस्त बनी रहती है.

जबकि अरबपति उद्दोगपति हमेशा सरकारी बैंकों से गलत तरीके से लों लेने में व्यस्त रहते हैं और समय आने पर देश का पैसा विदेश लेकर भाग जाते हैं.



इसके अलावा भारत के प्राइवेट सेक्टर का हाल आप देख ही रहे होंगे, 20 करोड़ के कुल संपत्ति है तो 80 करोड़ धोखाधड़ी से सरकारी बैंक से लोन लिए हुए हैं. लगभग हर एक बड़ा उद्दोग पति कुछ न कुछ फ्रॉड जरुर कर रहा है और आज तो कुछ सरकार के करीबी पूँजीपति मार्केट में कब्जा करके छोटे उद्दोंगों व छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट करने में लगे हैं. 

अभी अरबपति भगोड़ों को आपने देख ही लिया, नीरव मोदी, विजय माल्या और न जाने कितने उद्दोगपति देश का पैसा दबाये बैठे हैं. नीरव मोदी तो भाग गया लेकिन PNB के अधिकारी नहीं भाग पाये, क्योंकि उन्हें देश छोड़ने से पहले विभाग से परमीशन लेनी पड़ती है.

नीरव मोदी को LOU जारी करने की PNB अधिकारियों की कोइ मजबूरी नहीं थी लेकिन अगर नहीं दोगे तो किसी राजनेता का फोन आ जाता, बेइज्जती अलग होती और प्रमोशन पर असर भी पड़ता, वेसे भी नीरव मोदी जी घोटाले के समय PM मोदी जी के साथ ग्रुप फोटो खिचवा रहे थे.

वैसे भी PM साहब जब JIO के विज्ञापन में दिख रहे हैं और जेटली साहब PAYTM बैंक का उद्घाटन कर रहे हैं तो भैया उद्दोगपतियों की बात तो माननी ही पड़ेगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे लोग भी देश के गैस ब्लॉक से गैस चोरी कर रहे हैं, जो कि PM के करीबी माने जाते हैं.

अभी तो कुछ सेक्टरों पर जैसे कि SCHOOLS और HASPITALS पर ही प्राइवेट क्षेत्र का कब्जा हुआ है तो आप इतना परेशान है अगर सभी क्षेत्रों में भी प्राइवेट हो गया तो महगाई आसमान छुएगी तब आप अपनी मूर्खता पर पछताएगे.



वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिन्स ने भी कहा था कि अगर चिकित्सा व शिक्षा जैसे क्षेत्र प्राइवेट में चले जायेगें तो प्रॉफिट मेकिंग के कारण ये सेवाएं बहुत महँगी हो जायेगी और आम लोगों का जीवन दूभर हो जायेगा. स्टीफन हॉकिन्स की बीमारी का खर्च वहां की सरकार ने उठाया इसलिए वे वैज्ञानिक बन गए और अगर वो भारत में होते तो ऐसी बीमारी के खर्च से परेशान होकर इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे होते.

इस सबके बाद भी अगर आप सरकारी की बजाय प्राइवेट सेक्टर का सपोर्ट या तारीफ करते हैं तो आप देश का भला नहीं चाहते हैं, बल्कि देश को लुटवाना चाहते हैं. देश की सरकारी संस्थाओं को बेचकर बड़े प्राइवेट उद्दोगपतियों को मालामाल करने के इस खेल में देश के कई बड़े नेता भी शामिल हैं और हम भी मूर्खतावश उन्हीं नेताओं की पूजा कर रहे हैं.

अंत में एक बात और सरकारी तंत्र के भ्रस्टाचार से निपटने के लिए हमारे पास एक बड़ा हथियार RTI है, जिससे (PMO) PRIME MININSTER OFFICE भी डरता है, अभी हाल ही में कई RTI का जवाब देने से मोदी सरकार के PMO ने आनाकानी की थी, तब मुख्य सूचना अधिकारी की झाड़ के बाद PMO को इंफॉर्मेशन देनी पड़ी थी, जिसमें कि एक ये सूचना मांगी गयी थी कि PM साहब के साथ विदेश दौरों पर कौन कौन उद्धोगपति साथ गए थे तो PMO बहानेबाजी करने लगा था.

RTI प्राइवेट सेक्टर पर लागू नहीं है, यानि जितना curruption करना हो करो, आप जानकारी भी नहीं ले सकते इन निजी कंपनियों से. इसलिए यदि आप भी ऐसे लोगों में शामिल हैं, जो कि आँख बंद करके सरकारी संस्थाओं व कर्मचारियों को गाली देते हैं तो ऐसी मूर्खता बंद करें और प्राइवेट व कुछ राजनेताओं द्वारा अरबपतियों के हाथों देश की संपत्तियां बेचने का विरोध करें.


नरेन्द्र यादव के पेज से, सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट



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