प्रदेश में जबरदस्त एन्टी इनकम्बेंसी का माहौल, सत्ता में वापिसी कर रही है कांग्रेस




janjagran.net और digitalindia18.com टीम का विश्लेषण 
कांग्रेस 148-153 
बीजेपी 70-75 निर्दलीय/अन्य 6-8 



मध्यप्रदेश में 28 नबम्बर को विधानसभा चुनाव होने हैं. प्रदेश की बीजेपी सरकार के प्रति एन्टी इनकम्बेंसी का माहौल है. विधायक मंत्रियों को क्षेत्र से भागना पड़ रहा है, यहाँ तक कि हाल में मुख्यमंत्री  शिवराज के लिए प्रचार करने बुधनी पहुंचीं उनकी पत्नी साधना सिंह तक को क्षेत्र की महिलाओं से खरी खोटी सुन कर लौटना पड़ गया. प्रदेश में किसी प्रकार की 2013 जैसी कोई लहर नहीं है. यह बात बीजेपी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर खुद भी स्वीकार चुके हैं. 

प्रत्याशी चयन में बीजेपी की निश्चित रूप से कमी रही है. इस कारण बड़ी संख्या में बागी खेल बिगाड़ रहे दिखते हैं. वहीं कांग्रेस अलग अलग गुट में अलग अलग क्षेत्र में काम बाँट कर अपनी अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जो कांग्रेस के लिए सत्ता की राह आसान कर रहे हैं. कुल मिला कर कहा जाए तो कांग्रेस सत्ता में वापिसी कर रही है. उसे 148-153 के लगभग सीट मिलती दिख रही हैं. वहीं बीजेपी 70-75 के बीच सिमटती लग रही है. निर्दलीय अन्य के खाते में भी 6-8 सीट जा सकती हैं. 

अलबत्ता कांग्रेस के लिए दबी दबी से लहर देखी जा रही है. लोगों में गुस्सा है और वे विकल्प के रूप में कांग्रेस की तरफ ही देख रहे हैं. बजह साफ़ है कि कोई तीसरा विकल्प अपना बजूद नहीं बना सका है. बसपा, सपा या आम आदमी पार्टी कोई अस्तित्व पैदा नहीं कर सकी. हाल में उपजी सपाक्स भी कोई ख़ास करती नहीं दिख रही है. 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र बुधनी से कांग्रेस की तरफ से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के मैदान में उतरने के बाद अब लड़ाई दोनों पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गई है. यहाँ से बीजेपी और शिवराज के लिए बुरी खबर है. शिवराज के लिए प्रचार करने बुधनी पहुंचीं उनकी पत्नी साधना सिंह से क्षेत्र की कुछ महिलाओं ने जब क्षेत्र में पानी ना होने की शिकायत की तो साधना सिंह ने भरोसा दिया कि जितने काम नहीं हुए हैं वे सब हो जाएंगे. कब होंगे, कह कर महिलायें उन पर भड़क गईं और खूब खरी खोटी सुनाई. तब साधना सिंह को वापिस लौटना पड़ा, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है. 

मामला रेंहटी के नसरुल्लागंज रोड स्थित आवास कालोनी का है. जहाँ साधना सिंह ने बस्ती-बस्ती जाकर सीएम शिवराज के लिए वोट मांग कर और उन्हें प्रचंड मतों से जिताने की अपील कर रही थीं. 

सीहोर के बुधनी विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव का कहना है कि शिवराज से मुझे नर्मदा में अवैध खनन का हिसाब पूरा करना है. उनके लिए कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर काम कर रहे हैं. इससे शिवराज की जीत होगी ही, साफ़ नहीं कहा जा सकता. यदि यहाँ से शिवराज हार जाते हैं तो पार्टी में चेहरा कौन होगा, यह सवाल भी उठने लगा है. 



कांग्रेस सरकार में पूर्व शिक्षा मंत्री रहे राजकुमार पटेल का कहना है मुख्यमंत्री शिवराज के खिलाफ अरुण यादव को टिकिट देकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हमारी परीक्षा लेना चाही है. इस परीक्षा में हम पूरी तरह सफल होकर राहुल जी से मिलने जायेंगे. यहाँ से हमें कोई नहीं हरा सकता, बुधनी से इस बार शिवराज की हार निश्चित है. 

देखिये, मुख्यमंत्री शिवराज की धर्मपत्नी साधना सिंह जी के चुनाव प्रचार के दौरान का दृश्य. मुख्यमंत्री के क्षेत्र में ये हालात है तो बाकि दूसरे जिलों में क्या होगा? भाजपा का नारा बीमारू से विकसित और अब विकसित से समृद्ध प्रदेश खोखला हो गया है.


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सगे साले संजय सिंह भी स्थिति भांप कर कांग्रेस में चले गए. वे अब वारा सिवनी से कांग्रेस उम्मीदवार हैं. श्री संजय के बीजेपी छोड़ कर जाने से पूरे प्रदेश में पार्टी के प्रति अच्छा सन्देश नहीं गया. 

बीजेपी सरकार में मंत्री रहे रामकृष्ण कुसमारिया, के एल अग्रवाल और पूर्व वित्तमंत्री राघवजी भाई बड़ी मुसीबत खड़ी कर रहे हैं. जहाँ रामकृष्ण कुसमारिया 2 सीटों पर निर्दलीय उतर कर मुसीबत बन रहे हैं, वहीं के एल अग्रवाल और पूर्व वित्तमंत्री राघवजी भाई भी अपने ही प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं. राघवजी भाई शमशाबाद में अपनी जीत के प्रति आश्वश्त हैं. श्री राघवजी अपनी बेटी ज्योति शाह के लिए बीजेपी से टिकिट चाह रहे थे, नहीं मिलने पर वे मैदान में खुद उतर गए हैं. राघवजी शमशाबाद के अलावा विदिशा में भी बीजेपी प्रत्याशी मुकेश टंडन के लिए मुसीबत बन रहे हैं. 

विदिशा जिले की सिरोंज सीट अलबत्ता दिग्विजय सिंह ने अपनी करीबी मशर्रत शाहिद को दिलाने में सफलता पा ली हो, लेकिन उन्हें यह सीट निकालना आसान नहीं होगा. यहाँ से संवाददाता राजेश वशिष्ठ के अनुसार पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत के बड़े भाई उमाकांत शर्मा बीजेपी से प्रत्याशी है. उनकी जीत निश्चित बताई जा रही है. कांग्रेस के पूर्व घोषित प्रत्याशी अशोक त्यागी कांग्रेस की बजाय बीजेपी की तरफ रूचि रख रहे बताये जा रहे हैं. उनका नाम काट कर प्रत्याशी बदल दिया गया, ऐसे में नाराजगी स्वाभाविक है.



राजधानी भोपाल की बात करें तो यहाँ के दक्षिण पश्चिम से बीजेपी सरकार में मंत्री रहे उमाशंकर गुप्ता की हालत भी इस बार पतली बताई जा रही है. उन्हें क्षेत्र में जनसंपर्क के समय क्षेत्रीय लोगों ने समस्याएं नजर अंदाज करने के लिए खूब खरी खोटी सुनाईं. यहाँ तक कि उन्हें क्षेत्र से भागना पड़ा. यहाँ से कांग्रेस प्रत्याशी पी सी शर्मा के पक्ष में एक तरफ़ा माहौल बताया जा रहा है. 

क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल भी मैदान में हैं. वह जीतें भले न, लेकिन उनका प्रयास है कि कम से कम एक सम्मान जनक स्कोर खड़ा कर सकें, ताकि आगे मौका मिल सके और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का पद बना रह सके. उनके इस प्रयास से भी बीजेपी प्रत्याशी उमाशंकर गुप्ता को क्षति होगी. कहा जा सकता है यह सीट इस बार कांग्रेस की झोली में जाती दिख रही है.  

भोपाल की ही बीजेपी की रही हुजूर सीट पर इस बार बीजेपी के वर्तमान विधायक रामेश्वर शर्मा और पूर्व विधायक जीतेन्द्र डागा के बीच जंग होने से कांग्रेस प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी की राह आसान हो गई माना जा रहा है. हालांकि अभी पूर्व विधायक जीतेन्द्र डागा को मनाने के प्रयास किये जा रहे हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि श्री डागा ने साफ़ कह दिया है बिठाना है तो रामेश्वर को बिठाओ, हम बीजेपी के थे, बीजेपी में रहेंगे. 

भोपाल की बैरसिया में भी बीजेपी प्रत्याशी विष्णु खत्री को अपने ही लोगों से लड़ना पड़ रहा है यहाँ से बीजेपी के पूर्व विधायक ब्रह्मानंद रत्नाकर निर्दलीय मैदान में जमे हुए हैं. गोविन्दपुरा में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने पार्टी को मजबूर करके अपनी बहु को टिकिट तो ले लिया, लेकिन अब भीतरघात का बड़ा सामना करना पड़ रहा है. क्षेत्र के बीजेपी नेता और कार्यकर्ताओं का कहना है कि 'अब इतने दशकों तक बाबु जी को झेला अब इतने ही सालों बहु जी को झेलना होगा सो हराओ भैया' क्षेत्र में यह आम जुमला बन गया है. यहाँ से कांग्रेस प्रत्याशी गिरीश शर्मा काफी मिलनसार बताये जाते हैं. उन्हें बीजेपी के कई बड़े नेताओं का अप्रत्यक्ष रूप से साथ मिल रहा बताया जा रहा है. 

इसी प्रकार भोपाल की मध्य सीट से बीजेपी प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह को अपने ही लोगों से जूझना पड़ रहा है. भोपाल की नरेला सीट से विश्वास सारंग के बारे में भी क्षेत्र में जोरों से चर्चा है कि महाराज तो राजयोग लिखा कर लाये हैं. देखते हैं इस बार. उल्लेखनीय है विश्वास सारंग क्षेत्र में यह बात किये थे कि हमारे तो किस्मत में राज योग है. 



उत्तर में कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ अकील के पक्ष में कांग्रेस के कार्यकर्ता श्री अकील को कहते हैं आप तो निश्चिन्त होकर कुछ और काम देखो, क्षेत्र में वोट तो हम संभाल लेंगे. यहाँ कार्यकर्ता बेहद उत्साहित हैं. वहीं बीजेपी प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुभारम्भ तो किया, लेकिन उसके बाद से ही यहाँ सुनसान देखा जा रहा है. 

इस प्रकार देखें तो राजधानी की लगभग सभी सीटों पर बीजेपी की स्थिति काफी मुश्किल में दिख रही है. वहीं कांग्रेस यहाँ से ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने की बात कर रही है. 

राजधानी से बाहर की बात करें तो बीजेपी सरकार में मंत्री रहे सुरेन्द्र पटवा की हालत खराब बताई जा रही है. उन पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लग रहा है. वहीं इस बार कांग्रेस से सुरेश पचौरी का खाता खुल सकता है. 

सीहोर में बीजेपी प्रत्याशी सुदेश राय को बीजेपी के ही सीहोर के कद्दावर नेता सक्सेना टक्कर दे रहे हैं. इससे यहाँ से कांग्रेस प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह की लाटरी लगती दिख रही है. आष्टा से कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह की स्थिति अच्छी बताई जा रही है, वहीं इछावर से बीजेपी के पूर्व मंत्री करण सिंह वर्मा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं. 

होशंगाबाद में बीजेपी प्रत्याशी विधान सभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा अपनी ही पार्टी के पूर्व मंत्री सरताज सिंह, जो अब कांग्रेस में शामिल होकर चुनाव मैदान में हैं, से जीत खटाई में पड़ती देख रहे हैं. वह सरताज सिंह के पैर भी छू लिए, लेकिन सरताज को मना नहीं सके. 

इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्र. 2 से भाजपा प्रत्याशी रमेश दादा की अच्छी स्थिति बताई जा रही है. यहाँ से बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय की जीत भी सुनिश्चित मानी जा रही है.  

उज्जैन की घटिया सीट से कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में गए प्रेमचन्द गुड्डू अपने बेटे को बीजेपी से टिकिट तो दिला लिए पर जिता पायेंगे, इसमें शंशय बना हुआ है. सागर में बीजेपी सरकार में गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह की स्थिति खराब बताई जा रही है. 

दमोह विधानसभा सीट पर पिछले 28 साल से बीजेपी का कब्जा है और इस सीट से राज्य के वित्त मंत्री जयंत मलैया विधायक हैं. इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रहती है. सीट पर कुल 2.12 लाख मतदाता हैं. पिछले चुनाव की बात करें तो साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के जयंत मलैया और कांग्रेस के चंद्रभान के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. इस चुनाव में मलैया मात्र 5 हजार वोट से जीत सके थे. इस बार श्री मलैया की स्थिति इसी से आंकी जा सकती है. एन्टी इनकम्बेंसी का माहौल यहाँ देखा जा रहा है. श्री मलैया को यह सीट खोनी पड़ सकती है. 

बीजेपी ने ग्वालियर पूर्व से विधायक व मंत्री माया सिंह का टिकिट काट कर उनकी जगह विधायक रहे सत्यपाल सिंह सिकरवार के भाई सतीश सिकरवार को उम्मीदवार बनाया है. यहाँ से माया सिंह का टिकिट काटना बीजेपी को भारी पड़ सकता है. 

विन्ध्य क्षेत्र से चुरहट विधानसभा से विधायक अजय सिंह उर्फ राहुल भैया कांग्रेस के एक बड़े चेहरे हैं. वे नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, के ऊपर पूरे विन्ध्य क्षेत्र में कांग्रेस को जिताने की जिम्मेदारी दी गई है. जिसे वह बखूबी अंजाम देने में लगे हैं. 

नागदा खाचरोद के ग्राम लासुडिया नागदा से DNA न्यूज़ संवाददाता संजय शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बीजेपी उममीदवार दिलीप सिंह शेखावत को ग्रामीणों के विरोध के बाद जन सम्पर्क छोड़ कर भागना पड़ गया. श्री शेखावत नागदा खाचरोद के ग्राम लासुडिया में मंडल अध्यक्ष के साथ जनसंपर्क पर थे. यहाँ ग्रामीणों द्वारा 5 साल के कार्यों को लेकर भारी आक्रोश था. उनके विरोध के बाद विधायक जी को बीच में ही जन संपर्क छोड़कर जाना पड़ा. 




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