तक़दीर सब कुछ, लेकिन तदबीर भी बहुत कुछ होती है -एक सूफी संत, जिसने जलाई सद्भावना की अलख


''सियासी महफिलों में उनकी मौजूदगी अक्सर दिखाई दे जाती है। सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी आवाजाही आम है। मजहबी प्रोग्राम में उनका शामिल रहना अवश्यम्भावी जैसा है। इसमें मायने ये नहीं रखता कि आयोजन किस धर्म, समाज, तबके या वर्ग का है। सामाजिक समन्वय की जरूरत को पूरा करने में जुटे बाबा इमरान इंसानों के बीच तेजी से खत्म होते जा रहे भाईचारे, आपसी रिश्ते, सद्भाव और एकता को पुनर्जीवित और पुनर्स्थापित करने की अलख जगाए हुए हैं।''
- खान अशु

भोपाल। प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर से ताल्लुक रखने वाले बाबा हजरत इमरान अपने शहर की सीमाओं को कब से भुला चुके हैं। अब सारी दुनिया उनका कुनबा है और हर इंसान उनका बिरादर। इंसानी बिरादरी की सबसे बड़ी जरूरत आपसी समन्वय और भाईचारे की फिक्र को लेकर वे काम में लगे हैं।


तकदीर और तदबीर के बीच की कड़ी
ईश्वर, अल्लाह ने हर इंसान की तकदीर तय कर उसे इस जमीन पर भेजा है। जब-जब, जो-जो होना है, तब-तब वो-वो होता है लेकिन दुवाएं बहुत कुछ बदलने की ताकत रखती हैं। अल्लाह अपने नेक बंदों की दुआएं जल्दी सुनता है। 

बाबा इमरान कहते हैं कि भागती-दौड़ती आज की दुनिया में परेशानियों का बसेरा है। सच्चे दिल और नेक नीयत से की गई दुआओं में असर होता है। ना कोई आडम्बर, न कोई दिखावा, न किसी चमत्कार का दावा, हम सिर्फ दुआ करते हैं, अल्लाह की अजीम जात लोगों की परेशानी से निजात के रास्ते बनाती है। 

मैं सबका, सब मेरे...
कभी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ वे मंच साझा करते दिखाई देते हैं तो कभी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ उनकी कदमताल दिखाई देती है। कभी मंत्री रामपाल सिंह उनके साथ श्रद्धा से मिलते नजर आते हैं तो कभी मप्र वक्फ बोर्ड के चैयरमेन शौकत मोहम्मद खान या मप्र मदरसा बोर्ड अध्यक्ष प्रो. सैयद इमाद उद्दीन उनके बगलगीर दिखाई देते हैं। बाबा का कोई सियासी लगाव या झुकाव है, क्या के सवाल पर वे कहते हैं कि सारा संसार मेरा है, मैं सारी दुनिया का। दर पर आने वाला या अपनी चौखट श्रद्धा से बुलाने वाला हर शख्स मेरा अजीज है। मेरे लिए कोई छोटा है और न बड़ा। ना कोई पार्टी, न कोई दल और न कोई नेता, मेरे लिए सब समान हैं। मैं सबके लिए, सब मेरे लिए हैं।


सर्व धर्म सम्मान की विचारधारा
बाबा इमरान हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी सभी धर्म के लोगों में समान सम्मान पाते हैं और उनके आयोजन में शामिल होते हैं। सामाजिक विपत्तियों के दौर में भी वे आगे नजर आते हैं। बाबा इमरान का मानना है कि सारी दुनिया एक ईश्वर की पैदा की हुई सन्तान हैं। इनमें भेद करने वाला दुनिया का मुजरिम और अल्लाह का बड़ा गुनाहगार है। सबका मान, सबको सम्मान, सबकी आस्था को तरजीह और सबके अक़ीदे को बरकरार रखने की नीयत होगी तो दुनिया में भी कामयाबी मिलेगी और अल्लाह भी आपसे राजी होंगे।

एक चौखट का नहीं बंधन
इंदौर में बाबा इमरान की संगत पाने के ख्वाहिशमंद लोगों का जमावड़ा हर दिन लगा होता है। दूर दराज से देश-विदेश से उनके अनुयायियों की आमद हर दिन होते है। 

अपने व्यक्तिगत, कारोबारी, सियासी, सामाजिक मसलों का हल तलाशने आने वाले इन लोगों को बाबा की दुआओं की तासीर फायदा पहुंचा रही है, उनकी मुश्किल, परेशानी और समस्याओं पर निजात दिला रही है। बाबा इमरान कहते हैं कि घर की चौखट सबको बुलाना उनका मकसद नहीं है, परेशान या जरूरतमंद लोगों के लिए वे उनके घरों और शहरों तक भी पहुँचते हैं। उन्होंने कहा कि अनुयायियों के अनुरोध पर वे देशभर के विभिन्न शहरों में अलग-अलग समय पर मौजूद रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करेगे। इसकी शुरुआत वे जल्दी ही भोपाल यात्रा से करने वाले हैं।

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