आखिर रक्षक क्यों बना भक्षक? घटना के पीछे की वह ख़ास बजह, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया तो...


''एक वीडियो वायरल है गुड़गांव शूटआउट का, जिसमें एक पुलिस के सिपाही महिपाल सिंह यादव ने जज की पत्नी और उसके बेटे को गोली मारी है, उन दोनों की मौत हो चुकी है. घटना के पीछे की वह ख़ास बजह, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृति होने से नहीं रोका जा सकेगा. बेहतर होगा कि कुछ ऐसा अवश्य किया जाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति न हो.'' 
- आकाश नागर 

कई अधिकारी अपने को मिले गनमेन, ड्रायवर के साथ बहुत अच्छा व्यवहार रखते हैं, लेकिन कई अधिकारी अपने को मिले गनमेन, ड्रायवर यहाँ तक कि अधीनस्थ के साथ तक नौकर जैसा बर्ताव करने लगते हैं. सामान्यतः यही माना जा रहा है कि अधिकारी डांटता होगा छुट्टी नहीं देता होगा सो नाराजी में उसने ऐसा कर दिया, लेकिन बात इतनी सी नहीं है. 

आखिर रक्षक क्यों बना भक्षक? की जब पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि घटना उतनी सामान्य नहीं है जैसी की मानी जा रही है. असल में मरने वालों की संख्या 2 नहीं 3 है. वो जो तीसरे व्यक्ति की मृत्यु हुई है, वह सिपाही का बेटी थी, जिसे वह अस्पताल नहीं ले जा पाया, क्योंकि जज की पत्नी और बेटे को शॉपिंग करवानी थी, और शॉपिंग 5-5 घंटों तक चलती रही. जानकारी के अनुसार उस सिपाही के घर से सुबह से बार-बार फोन आता रहा और उसने अपनी बेटी की बीमारी की बात जज को कई बार बताई, लेकिन जज यही कहते रहे कि, पहले मैडम को शॉपिंग करवा लाओ फिर अस्पताल चले जाना. फिर उसके घर से आखिरी बार फोन आता है, जिसमें उसकी पत्नी कहती है, "बेटी तो अब रही नहीं, तुम अपनी नौकरी करो!" 

बेटी इस दुनिया में रही नहीं पत्नी ने भी दुत्कार दिया. कहा जा रहा है आखिर ऐसे में वह क्या करता?
बात तो यह है कि वह सिपाही उस जज का गनर था, उनकी पत्नी और बेटे का नहीं, लेकिन यह जज लोग सिपाही को अपना पर्सनल नौकर समझ के अपने किसी भी परिवारी जन के साथ भेज देते हैं, जब वह सिपाही उन दोनों को गोली मार रहा था तो वह उन दोनों को खूब गालियां भी दे रहा था. वह कह रहा था "यह शैतान है और यह शैतान की मां है!" जाहिर सी बात है कि उसने अचानक ही गोली मारने का मन नहीं बनाया होगा, उसके मन में एक तरह की खिसियाहट पहले से रही होगी. आज जब इन्हीं लोगों की वजह से उसकी बेटी इस दुनिया से चली गयी तो उसने अपने तात्कालिक व पुराने गुस्से को एक-कर के उन दोनों के सिर में गोली मार दी.

उल्लेखनीय है जब किसी उच्च पद पर बैठे व्यक्ति को कोई गनर प्राप्त होता है, तो उनमें से अक्सर कई अधिकारी उसको अपना पर्सनल नौकर समझ लेते हैं और ऐसे-ऐसे काम करवाते हैं, जो उसकी गरिमा के खिलाफ होता है. उसे वह सम्मान नहीं देते, जो उसे मिलना चाहिए, बल्कि उसे लोगों के सामने डांटते हैं, अपमानित करते हैं! इस तरह की कई घटनाएं पहले भी सामने आई हैं. क्यों भाई, वह भी इंसान है, वह भी पढ़ा लिखा है, तुम उसको इस तरह क्यों अपमानित करोगे, क्योंकि वह एक सिपाही है, इसलिए! यदि ऐसा ही चलता रहा तो और हमने घटना की सही बजह जानकार उसे दुरुस्त नहीं किया तो आगे भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृति होने से नहीं रोका जा सकेगा. बेहतर होगा कि कुछ ऐसा अवश्य किया जाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति न हो. 

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc