क्रूरता की हद्द ही है यह


''क्रूरता की हद्द ही है. पुलिस हमारी रक्षक होती है. अपराध कोई भी हो सजा के लिए कानून बने हैं और पुलिस कानून की रखवाली करने वाली प्रहरी, जो हर पल सबकी सहायता के लिए मौजूद रहते हैं. वही जब ऐसा करने लग जाए, तो कोई कहाँ जाए?'' 
- सीमा राय द्विवेदी 

पंजाब के अमृतसर के कस्बा कत्थूनगढ़ के गाँव शहजादा की घटना है. जहाँ महिला को पुलिस ने गाडी की छत से बाँध कर गाडी 60 की स्पीड में दौड़ा दी. किसी पर जब कोई अत्याचार जब बढ़ जाता है तो हम थाने जाकर रिपोर्ट लिखवाते हैं और अपने लिए न्याय की माँग करते हैं, जब वही पुलिस इस प्रकार की क्रूरता पर उतर आए. महिला को गाड़ी की छत पर लिटाकर सिक्सटी की स्पीड में गाड़ी चला दे. वह चलती गाड़ी से गिर गई. बेहद दु:खद और शर्मनाक है. वह तो ऊपर वाले की कृपा रही वर्ना यदि कोई पीछे से गाड़ी आ रही होती और उसके ऊपर से गुजर जाती  तो...

निश्चित ही यह पुलिसिया मानसिक विकार है. ऐसे पुलिस कर्मियों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए? रक्षक ही आक्रामक बन जाये तो कोई कहाँ जाय? क्या कोई इस महिला की मनोदशा का अंदाजा लगा सकेगा? क्या कभी भी वो खाकी वर्दी की दहशत से बाहर आ पायेगी? 

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News Digital India 18

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