किशोरों के साथ बढ़ रही घटनाओं के बाद सरकार हुई सजग, सजा का किया बड़ा प्रावधान


''किशोरों के साथ लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद आखिरकार सरकार जाग गई है. सरकार ने अब किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के अन्तर्गत 0 से 18 वर्ष की आयु के बालकों की देखरेख और संरक्षण हेतु संचालित समस्त संस्थाओं का पंजीयन अनिवार्य कर दिया है.''

अब अधिनियम की धारा 42 के अन्तर्गत ऐसा कोई व्यक्ति या संस्था जो अधिनियम की धारा 41 (1) के अन्तर्गत पंजीकृत नहीं है, देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों को संरक्षण देती है, तो ऐसी संस्था या व्यक्ति को एक वर्ष का कारावास या एक लाख रूपए का जुर्माना या दोनों से दण्डित किए जाने का प्रावधान है.

भोपाल. किशोरों के साथ लगातार बढ़ रही घटनाओं के बाद आखिरकार सरकार सजग हो गई है. अब यदि किसी भी प्रकार से कोई संस्था या व्यक्ति, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के अन्तर्गत शासन से मान्यता के नहीं होने के बाद भी बालकों की देखरेख और संरक्षण के प्रयोजन कार्य में लिप्त है तो ऐसी संस्था की जानकारी जिला बाल संरक्षण अधिकारी को दी जा सकती है. 
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News Digital India 18

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