CM का बड़ा बयान, नहीं होगा एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग, जांच के बाद होगी कार्रवाई




''एट्रोसिटी एक्ट के बढ़ते विरोध के चलते मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बालाघाट में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं होगा और जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.''


इस बयान के जरिए एक प्रकार से उन्होंने अपनी ही केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दे दी है. उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. प्रदेश में एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं होने देंगे और जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी. पहले यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया था, लेकिन आरक्षित वर्ग के भारी विरोध प्रदर्शन और उन्हें खुश करने केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने के लिए कानून में संशोधन कर दिया था, जिसके बाद से सवर्ण वर्ग सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. इधर मप्र में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. ऐसे में सरकार को डर है कि सवर्ण वर्ग के वोट अगर कट जाते हैं, तो सरकार की मुश्किलें और बढ़ जाएगीं.

सवर्णों के बढ़ते विरोध को देखते हुए राजनीतिक दलों में बड़ी पसोपेश की स्थिति बनी हुई है. बताया यह भी जा रहा है कि सरकार सपाक्स के 30 तारीख को भोपाल में होने वाले आन्दोलन से घबरा गई है. अब सीएम की इस तरह की घोषणा के बाद जहाँ कुछ लोग इसे शानदार फैसला और समाज में समरसता का भाव पैदा होगा बताराहे हैं, वहीं लोग यह भी जता रहे हैं कि क्या मध्यप्रदेश देश से अलग हो गया या किसी एक प्रदेश का सीएम किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर अलग क़ानून बना सकता है?  
लोग लिख रहे हैं 'फिर एक और झूठ फिर एक और कोरी घोषणा ??'

चुनावी हलवा     

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एसटी एससी एक्ट को लेकर आज जो घोषणा की है वह चुनावी हलवा है, लेकिन हमें हलवा पसंद नहीं करना है, क्योंकि संविधान को पलटने का अधिकार शिवराज सिंह चौहान को नहीं है. लिखा है यह तो हद हो गई सवर्ण और पिछड़ा वर्ग को बेवकूफ समझने की.

श्री Surendra Singh Rajput जी ने लिखा है - मध्यप्रदेश की सरकार और मुखिया क्या कानून से बड़े हो गए, ये अधिकार केंद्रीय कैबिनेट ओर सुप्रीम कोर्ट के पास है और सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने पर उसके खिलाफ सरकार जा चुकी है, और बदले गए फैसले को ओर मजबूत बना कर केंद्रीय सरकार ने अध्यादेश लाकर पास किया है, ये संभव ही नहीं है बिना केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के ..




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