मैं तारा नहीं हूँ


मैं तारा नहीं हूँ 
जो टिमटिमाऊंगी

मैं अपनी रौशनी से 
संसार के तिमिर को मिटाऊंगी

तारों की तरह मैं टूट कर
जमीन पर नहीं आऊँगी

शायद बार बार डूब जाऊँ पर
सूरज की स्वणिर्म आभा लेकिन 
फिर सुबह आऊँगी

बिना साहस नदी तैर ना पाए 
जिन में साहस हो पार करने की 
वही तट पार कर पाएगा

रास्ते में होगें कांटे हजार 
पत्थर लगेंगे, मैं गिर भी जाऊँ

फिर भी ऊठूंगी हँस कर 
इस बार पत्थरों से नहीं डरूंगी

हों चुनौतियाँ राहों में हजार 
चाहे मुश्किलें आती हों बार बार

नहीं रूकूंगी बढ़ती रहूँगी 
बार बार, हर बार

क्योंकि मेरी आँखों में है 
मंजिलें पाने की जिद

मुझे है खुद पर विश्वास 
और सीने में है कुछ कर दिखाने की जिद

कर ले कोई कितना भी छल
मैं न रूकूंगी, बढ़ती रहूँगी

है खुद पर विश्वास 
एक दिन मेरा साहस

रंग दिखाएगा जरूर
ऊंचाईयों पर परचम लहराऊंगी

गलतियाँ कर लूँ मैं चाहे हजार 
सिखूंगी उन गलियों से बार बार

फिर ऊठूंगी मैं न रूकूंगी 
मुझे मेरे मंजिल पाने की है जिद

मैं तारों की तरह नहीं टिमटिमाऊंगी 
तारों की तरह टूट कर जमीन पर नहीं आऊँगी

- अक्षिता गौतम 

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