केन्द्रीय मंत्री ने कहा '15 साल से कह रहा हूँ कोई सुन नहीं रहा, यदि ऐसा किया जाए तो काफी कम हो सकते हैं पेट्रोल डीजल के दाम'



''पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने में सरकार का कोई हाथ नहीं होता इसलिए सरकार दाम कम नहीं कर सकती, यह बात केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कही है. इसी के साथ केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने में रूपये का कमजोर होना बताते हुए कहते हैं कि रुपया कमजोर नहीं हुआ है, असल में डॉलर मजबूत हुआ है.  इन दोनों ही मंत्रियों को उनकी अपनी पार्टी और सरकार के केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह कह कर कि पेट्रोल 55 रुपये और डीज़ल 50 रुपये में उपलब्ध कराया जा सकता है, करारा जबाब दिया है.''



- बलभद्र मिश्रा /डिजिटल इंडिया न्यूज़ डेस्क 
श्री गडकरी ने सोमवार को दुर्ग जिले के चरौदा नगर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ पूरे देश के लिए जैव ईंधन का बड़ा केन्द्र बन सकता है. उन्होंने कहा "हमने फैसला किया है कि एथेनॉल, बायो डीज़ल, मेथेनॉल और बायो फ्यूल से चलने वाले ऑटो रिक्शा, बस, और टैक्सी के लिए परमिट की अनिवार्यता खत्म कर देंगे."

पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों के बारे में ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में पेट्रोलियम मंत्रालय पांच एथनॉल के प्लांट स्थापित कर रहा है, जहां एथनॉल का उत्पादन धान और गेहूं की भूसी, बांस और गन्ने से किया जाएगा. इससे पेट्रोल 55 रुपये और डीज़ल 50 रुपये में उपलब्ध होगा.  



गडकरी ने बताया, "नागपुर में लगभग एक हजार ट्रैक्टर जैव ईंधन से चल रहे हैं. आज आवश्यकता जैव ईंधन के क्षेत्र में रिसर्च करने की है." उन्होंने कहा कि हमने अभी पेट्रोल में एथनॉल मिलाकर वाहन चलाने का सफल प्रयोग किया है, इसे और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र में वृद्धि दर बहुत अच्छी है. यहां चावल, गेहूं, दालें और गन्ने का उत्पादन काफी मात्रा में होता है लेकिन राज्य जैव ईंधन के रूप में भी आगे बढ़ सकता है. छत्तीसगढ़ में उत्पादित जेट्रोफा जैव ईंधन का इस्तेमाल पहली जैव ईंधन से उड़ने वाले विमान में किया गया. यह विमान देहरादून से दिल्ली पहुंचा.

गडकरी ने कहा कि हम आठ लाख करोड़ रुपये के पेट्रोल और डीज़ल आयात कर रहे हैं और इसकी कीमतें बढ़ रही हैं. रुपया डॉलर के मुकाबले गिर रहा है. मैं पिछले 15 सालों से कह रहा हूं कि देश के किसान, आदिवासी और वनवासी एथनॉल, मेथेनॉल, जैव ईंधन का उत्पादन कर सकते हैं और विमान उड़ा सकते हैं, लेकिन कोई सुन ही नहीं रहा. 




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