VEDIO : लोग सड़क पर कैसे चलें? लाल बत्ती नहीं तो हूटर चला कहीं से भी निकल नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले मंत्री जी समझाएंगे






''मध्यप्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक होती दिखाई दे रही है। तभी तो मुख्यमंत्री ने सारे मंत्रियों से कहा है कि वे सड़क पर उतरें और लोगों को सुरक्षा के नियम बताएं। यह बहुत अच्छा निर्णय कहा जा सकता है, लेकिन सवाल तो यह है कि क्या मंत्री और बाकी जन प्रतिनिधि वास्तव में सड़क सुरक्षा के नियमों का स्वयं भी पालन करते हैं?''

- संजय सक्सेना 
प्रदेश सरकार ने कल ही निर्णय लिया है कि सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के लिये जन-जागृति अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान समाज की सहभागिता के साथ आगामी सितंबर से चलाया जाएगा। इसमें मंत्रिपरिषद के सदस्य सड़क पर खड़े होकर आम आदमी से अपील करेंगें। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि नियमों के पालन के लिये प्रवर्तन से पूर्व समझाइश की पहल की जानी चाहिए। लोगों को सड़क सुरक्षा की समस्या पर विचार करने के लिये प्रेरित किया जाना चाहिए। प्रेरणा और प्रोत्साहन के प्रयास बेहद जरूरी हैं। मुख्यमंत्री का कहना था कि भोपाल में जन-जागृति अभियान के शुभारंभ अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्य सड़क पर खड़े होकर नागरिकों से सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की अपील करें। सप्ताह के दौरान प्रभारी मंत्री अपने क्षेत्रों में भी जन-जागृति का कार्य करें। उन्होंने जन-जागृति अभियान में धर्मगुरुओं और समाज सेवियों का सहयोग भी लेने के लिये कहा ताकि सड़क-सुरक्षा नियमों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच निर्मित हो।

इसके साथ ही सीएम ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अभियान के संबंध में अग्रिम सूचना को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाये। पर्याप्त मात्रा में ब्रीथ एनालाइजर और स्पीड गन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाये, ताकि मदिरा पीकर और तेज गति से ड्राइविंग करने वालों के विरुद्ध प्रमाणिक कार्रवाई हो सके।

वास्तव में प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। इनमें मरने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। चाहे शहर के भीतर हो या हाइवे पर, सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। मुख्यमंत्री ने जिस अभियान की बात कही है, वो अभियान हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह या पखवाड़े के तहत चलाया जाता है, लेकिन उसके बेहतर परिणाम नहीं आ रहे हैं। असल में सबसे पहले तो यह देखा जाना चाहिए कि आखिर दुर्घटनाएं हो क्यों रही हैं? यातायात पुलिस सबसे पहले हेलमेट पर जोर देती है या फिर चार पहिया वाहन चालकों को सीट बैल्ट लगवाकर इतिश्री कर लेती है। हर बार दो पहिया वाहन ही ज्यादा निशाने पर रहते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ कि पुलिस ने शहरों के भीतर बड़े वाहनों, विशेषकर डम्पर या हाइवे पर चलने वाले ट्रकों के लिए कोई अभियान चलाया गया। सरकारी या पुलिस के वाहन चालकों के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया। कुछ माह पहले भोपाल में शासकीय वाहन चालकों के लिए नमूने के तौर पर चालान अभियान चला था, लेकिन फिर ठप्प हो गया। और अभी जैसे मुख्यमंत्री ने कहा है कि मंत्री सड़कों पर उतरें और लोगों को यातायात के नियम समझाएं, पहले उन्हें भी तो नियमों की जानकारी होना चाहिए। और फिर उन्हें खुद भी नियमों का पालन करना चाहिए। सबसे ज्यादा नियम तो मंत्रियों और नेताओं के वाहन तोड़ते हैं।

लाल बत्ती नहीं है तो हूटर चला कर कहीं से भी निकल जाते हैं, राइट-रांग उनके लिए कुछ नहीं होता। सरकारी और विशेषकर पुलिस के वाहन चालकों के तो कई बार लाइसेंस तक नहीं होते। उन्हें कौन सिखाए? नियम सभी के लिए हैं और सभी को पालन करना चाहिए। फिर भी यदि मंत्री और जन प्रतिनिधि यातायात के नियम समझाने के लिए सड़क पर आते हैं, तो इसके कुछ बेहतर परिणाम आ सकते हैं। हां, पहले उन्हें प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और यह भी तय हो कि वे नियम नहीं तोड़ेंगे। उन्हें शपथ दिलाई जाए। यदि नियम तोड़ते पाए जाएं तो उनसे दो या चार गुना चालान राशि वसूल की जाए।


मंत्री जी लाल बत्ती और हूटर को समझते है रखैल


और यह वीडियो देख लीजिये मध्यप्रदेश सरकार में पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव जी ये क्या कह रहे हैं- 



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