असली "सोना" तो बेटियाँ ही होती हैं, पिता के काम में ट्रेक्टर दौड़ा कर हाथ बंटाती है "सोना"




''मानना ही होगा कि बेटियाँ पिता के लिए ईश्वर की एक बड़ी नियामत होती हैं. फतेहाबाद के किसान सुखविंद्र जी की बिटिया सोना स्कूल से आने के बाद खेत में ट्रेक्टर भी अच्छा दौड़ा लेती है. खिलौनों से खेलने की उम्र में अपने पापा का खिलौना ले लेने की जिद ने उसे इस काबिल बना दिया है कि खेत में ट्रेक्टर लेकर घर का कुछ काम ही हल कर दें.'' 
- कमल जीत     



ट्रेक्टर की चाल देख कर आप सोना बिटिया के टैलेंट की प्रशंसा अवश्य कर सकते हैं. नैतिक और कानूनी रूप से बच्चों के हाथ में इतने बड़े यंत्र देना कितना सही है वो डॉ रणबीर सिंह ही बताएंगे, क्योंकि उन्ही की कही बातें जनता मानती है. 

आप भी ऐसा सोच सकते हैं जैसा कि कुछ और लोग भी यह कह रहे हैं कि बाहे हुए खेत में कल्टीवेटर चलाने की स्पीड से नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन 'सेवा' बाहना ही ठीक है. पहले गेड में ही लागू बहाने से नुकसान होता है. कल्टीवेटर टूट सकता है और ट्रेक्टर के इंजन पर जोर पड़ता है. 

बेटी तो युवा है, लेकिन शायद सुखविंदर जी उससे नियमित ट्रेक्टर नहीं चलवाते होंगें. फिर भी अनुभव बढने से खेत में क्या बोना है, उसके लिहाज़ से बहाई भी सीख लेगी. रान्वीर सिंह फोगट सुझाव देते हैं कि बेटी को पूरी ट्रेनिंग दी जाए और हर मौसम में इस द्वारा ट्रेक्टर चलाने की विडियो बनायी जाए, जिसे यू-ट्यूब पर भी अपलोड किया जाए. देश के दूसरे हिस्सों में भी बेटियाँ ट्रेक्टर चलाती हैं, खासकर उस स्थिति में जहां प्रोग्रेसिव लोगों ने फार्म हाउस बनाए हैं. 

मानना ही होगा कि बेटियाँ पिता के लिए ईश्वर की एक बड़ी नियामत होती हैं. देखें सोना का ट्रेक्टर दौड़ाते वीडियो-









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