मास्टर जी ने जाति पूछी तो बच्चों ने बताया 'मांगना खाना...भिक्षा बृत्ति..'



''गरीबी, जाति नहीं देखती, औरत आदमी नहीं देखती, बच्चे भी नहीं देखती। जिस दल को भी देखो वो जात पर ही राजनीति करता है। आरक्षण ....आरक्षण का खेल इस देश में चल रहा है। गंदी राजनीति ने देश में जातिवाद का, अल्पसंख्यक का, क्षेत्रियवाद का जहर बहुत गहराई तक घोल दिया गया है।''

विदिशा से मनोज कौशल सोनी    
'जातिवाद एक जहर है...' ये बाबा साहब अम्बेडकर के शब्द हैं। गरीबी एक अभिशाप है। कोई भी दल आर्थिक आधार पर आरक्षण का पक्ष नहीं करता। जाति की राजनीति हर दल करता है। गरीबी, जाति नहीं देखती, औरत आदमी नहीं देखती, बच्चे भी नहीं देखती। जिस दल को भी देखो वो जात पर ही राजनीति करता है। आरक्षण ....आरक्षण का खेल इस देश में चल रहा है। सभी दल और जातिया इसमें शामिल हैं। जिनको मिल रहा है, वह आरक्षण रूपी भीख से खुश हैं। जिनको नहीं मिला है, उनको लुभाने के काम भी दल कर रहे हैं। इस देश में जातिवाद का, अल्पसंख्यक का, क्षेत्रियवाद का जहर बहुत गहराई तक घोल दिया गया है।

आज कुछ बच्चो का प्रवेश स्कूल में करवाया। जब स्कूल में जाति पूछी गई तो जवाब सुन कर आप भी हैरान होंगे....जाति बताई.....मांगना खाना...भिक्षा बृत्ति.। ये जातिया नेताओं ने इस देश में बना दी हैं। जब आप आरक्षण जाति पर आधारित रखेंगे तो भिखारी ही पैदा होंगे। ये भिखारी एक कम्बल, एक दारू की बोतल में बिक कर आपको वोट देंगे।

आरक्षण का आधार सिर्फ और सिर्फ.... आर्थिक होना चाहिए। जिनको लाभ मिल रहा है, वह समाज भी आगे आये और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग करे। आज भी गरीबी सिर्फ जातिगत आरक्षण की बजह से ही है। आरक्षण...से मतलब सुबिधाओं से हो न कि ..उन्हें कम योग्यता पर भी आगे बढाने से हो। आप गरीब नाम की जाति को सम्पूर्ण शिक्षा की सुविधा दीजिये..  उसे आगे बढ़ने के मौके दीजिये,अच्छा वातावरण दीजिये।

जातिगत आरक्षण सच में जहर ही है, जो इस देश को मार रहा है। ये भीख है जो सरकार बांटती है। भिखमंगापन छोड़िये....सब उठ खड़े हो... जिनको मिल रहा है वह भी, जिनको नही मिल रहा है वह भी... सरकार को मजबूर करे कि आरक्षण आर्थिक हो न कि जातिगत, क्योंकि जातिया सिर्फ दो होती हैं अमीरी और गरीबी। आरक्षण गरीबी नाम की जाति को दीजिये...

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