विज्ञान में राजनीति घुस गई है, जमूरा नचा रहा है विज्ञान को?


''पीएम ने कहा नाली के पानी से गैस निकालकर स्टार्टअप योजना का लाभ लिया जा सकता है। मुझे आश्चर्य नहीं हुआ, क्योकि ये आदमी सिर्फ लफ्फाजी करना जानता है। अगवा के मगवा बोलना इनकी आदत में शुमार हो चुका है। इनकी बातों को नंदन या चंपक जैसे बाल पत्रिकाओं में पढ़ाया जा सकता है।''


- रंजन यादव  
लेकिन मुझे आश्चर्य होता है उन लोगो पर जो पीएम की बात सुनकर तालियां बजाए है। तालियां बजाने वाले लोग साधारण लोग नहीं थे। वे आईआईटी वाले लोग थे। भारत के सबसे बड़े प्रतिष्ठित शोध संस्थान के लोग थे। इन्हें शर्म नहीं आई ताली बजाने में यह दुखद है। नाली से पानी निकला और चाय वाले ने मीथेन गैस एकत्र करके चाय बना दिया, यह बात कौन मानेगा? यह कैसे संभव है? मीथेन को पाइप के सहारे आगे ले जाया जा सकता जो पूर्व और अंतिम निष्काषन में एयर प्रूफ होने चाहिए। यह आठवी क्लास का ज्ञान है। और बहती हुई नाली से मीथेन नहीं बन सकता। आईआईटी वालों को इतना भी नहीं मालूम कि मीथेन कैसे बनता है? 

आईआईटी देश के नाम पर कलंक है। यहां एक सुई नहीं बन सकता। करोड़ो के अनुदान किसलिए? जिस संस्थान के लोग मीथेन से ब्यूटेन और फिर द्रवित पेट्रालियम गैस में परिष्कृत विज्ञान को मजाक समझते है उन पर विश्वास कैसे?

इस देश को पागल बनाया जा रहा है। अगर आप पीएम की इस बात का समर्थन करते है तो बेहद शर्मनाक बात है। पार्टी और दल अलग मायने रखते है। पार्टी और व्यक्ति का समर्थन कीजिये। लेकिन ऐसी फर्जी ज्ञान को आगे बढ़ाएंगे तो आपके बच्चे चिरकुट हो जाएंगे। इस देश का भविष्य इतना पागल नहीं हो सकता। विज्ञान में राजनीति घुस गई है। जमूरा नचा रहा है विज्ञान को।

असल में 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वर्ल्ड बायोफ्यूल डे के मौके पर नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में कचरे से बायोफ्यूल बनाने पर जोर दिया. इस कार्यक्रम में उन्होंने वैकल्पिक माध्यमों से बिजली बनाने, प्रदूषण को कम करने, वैकल्पिक ऊर्जा का प्रसार करने की अपनी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बताया. इस अवसर पर उन्होंने प्रदूषण कम करने की सरकार की योजनाओं के अलावा तीन मजेदार किस्से भी सुनाए हैं,  आप भी सुनिए- 


पहला किस्सा चाय का
पीएम मोदी ने पहला किस्सा नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाने का सुनाया. पीएम ने कहा, 'मैंने एक बार अखबार में पढ़ा था, किसी छोटे से नगर में एक नाले के पास कोई चाय का ठेला लेकर खड़ा रहता था और चाय बेचता था. जब चाय बनाने की बात आती है तो मेरा ध्यान थोड़ा जल्दी जाता है (इस पर कार्यक्रम में मौजूद सभी लोग तालियां बजाते हुए हंस पड़े).'

पीएम ने आगे कहा, 'वहीं पर गंदी नाली चलती थी. उसके दिमाग में एक विचार आया. स्वाभाविक है कि गंदी नाली में गैस भी निकलती है. दुर्गंध भी आती थी. उसने एक बर्तन को उल्टा करके, उसमें छेद करके एक पाइप डाल दिया और जो गटर से गैस निकलती थी उसे अपने चाय के ठेले पर ले लिया. इसके बाद वह इसी गैस से चाय बनाने लगा. सिंपल सी टेक्नोलॉजी है.'

दूसरा किस्सा बायोगैस का   
पीएम मोदी ने दूसरा किस्सा बायोगैस से ट्यूवबेल पंप चलाने का सुनाया. उन्होंने कहा, 'कुछ साल पहले की बात है. उस समय मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था. एक दिन हमारा काफिला जा रहा था. हमारे आगे एक स्कूटरवाला ट्रैक्टर का बड़ा सा ट्यूब लेकर जा रहा था. आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई स्कूटर पर इतना बड़ा ट्यूब लेकर जा रहा था तो पीछे चल रही गाड़ियों के ड्राइवर डर रहे थे कि कहीं टकरा न जाएं. मैं भी हैरान था कि यह ऐसे कैसे ले जा रहा है. कोई भी समझदार व्यक्ति ट्यूब खाली कर देता और आगे जाकर हवा भर लेता. मैंने उसे रुकवाया. स्कूटरवाले से पूछा कि भाई क्या है ये, क्या कर रहे हो? गिर जाओगे, चोट लग जाएगी. उसने बताया कि वह अपने खेत जा रहा है.'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'हां ठीक है, पर खेत में ये भरा हुआ ट्यूब क्यों ले जा रहे हो? उसने बताया कि मेरे घर में किचन का जो कूड़ा-कचरा निकलता है और मेरे पास दो पशु हैं, उनके गोबर का इस्तेमाल मैं गैस के प्लांट में करता हूं. उसने बताया कि वह उस गैस को ट्यूब में भरता है और उसे लेकर खेत में जाता है. खेत में जाकर उससे पानी का पंप चलाता हूं.'

मोदी ने कहा, 'आप कल्पना कीजिए कि हमारे देश का किसान कितना सामर्थ्यवान है. आज भी हमारे किसान गांव के लोग कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते हैं. अगर स्टार्टअप की दुनिया के लोग इस पर ध्यान दें तो जो बड़े कॉलेज से नहीं मिलता है, वो किसान की सोच से मिल सकता है. हम इनको समेट कर चीजों को आगे बढ़ा सकते हैं.'

तीसरा किस्सा अफ्रीका से    
पीएम मोदी ने तीसरा किस्सा अफ्रीका का सुनाया जिसमें प्लास्टिक के इस्तेमाल की बात थी. उन्होंने कहा, 'मैंने अफ्रीकन कंट्री के गरीब लोगों का एक काम सोशल मीडिया पर देखा. वे गांव के प्लास्टिक के को जमा करके नदी के तट पर ले जाते हैं. लकड़ी लाकर उस प्लास्टिक को जलाकर पिघला देते हैं और नदी से बालू लेकर मिक्स करते हैं और उसके ब्लॉक बना देते हैं. वो ब्लॉक बड़ी मात्रा में बेचते हैं. कचरे की सफाई भी और नए प्रोडक्ट के साथ उसे बेचते भी हैं.


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