मिल बांचें में मुख्यमंत्री ने बच्चों को सुनाईं अर्जुन की कहानियां


''मिल बांचें कार्यक्रम में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने गृह जिले सीहोर के नसरुल्लागंज के ग्राम लाडकुई स्थित विद्यालय में स्कूली बच्चों से मिलने पहुंचे और बच्चों से कई बातें साझा की। उन्होंने बच्चों को अर्जुन की कहानियां सुनाईं और संवाद भी किया।''

आज पूरे प्रदेश में मिल बांचे कार्यक्रम का आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर प्रदेशभर के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में नेता-मंत्री, जनप्रतिनिधि, डॉक्टर, इंजीनियर, समाजसेवी बच्चों को पढ़ाने पहुंच रहे है। इसी कड़ी में आज मुख्यमंत्री शिवराज अपने गृह जिले सीहोर के नसरुल्लागंज के ग्राम लाडकुई स्थित विद्यालय में  स्कूली बच्चों से मिलने पहुंचे और बच्चों से कई बातें साझा की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को गिफ्ट ए बुक अभियान के तहत किताबें भेंट की गईं। ये किताबें पढ़ने के लिए बच्चों को दी जाएंगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री बच्चों से रुबरु भी हुए। उन्होंने अर्जुन की कहानियां भी सुनाई और संवाद भी किया। 

उन्होंने कहा कि मेरी ज़िंदगी का सबसे खुशी का पल वह है जब मैं अपने बच्चों के बीच होता हूँ। बच्चों के लिए यह समय है कि वे अपने भविष्य की तैयारी अभी से करें। मेरे बच्चों की आँखों में देख कर मेरा संकल्प और दृढ़ होता है कि इनका भविष्य बर्बाद नहीं होने दूँगा। 

उन्होंने कहा सरकार ने शिक्षा के लिए अधोसंरचना में सुधार किया, कई विद्यालय खोले, शिक्षकों की भर्ती की, जो स्कूल दूर थे उन तक पहुंचने के लिए हम ने बच्चों को, खासकर बेटियों को साइकिलें दी। सरकार ने शिक्षा को जनआंदोलन बनाने का काम किया है। अच्छी शिक्षा के लिए सारे संसाधन जुटाए, अधोसंरचना में सुधार किया, कई स्कूल खोले, उनके उन्नययन पर काम जारी है, शिक्षकों की भर्ती भी की। उन्होंने बच्चों के पालकों से आग्रह किया कि बच्चों पर पढ़ाई का बोझ इतना ना डालें कि बच्चे खेलना-कूदना ही छोड़ दें।  शिक्षक बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन समाज की भी कुछ जिम्मेदारी है।

सीएम ने कहा कि  प्रसन्नता की बात है कि आज कई ऐसी हस्तियां अपने स्कूल में बच्चों के साथ विचार साझा कर रही हैं जहां उन्होंने खुद शिक्षा प्राप्त की है। हमें अपने विद्यालयों को संवारना है, उसमें पढ़ रहे बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाना है। सरकार हर आवश्यक काम तो कर ही रही है। हमें चाहिए कि यदि स्कूल के लिए कोई छोटी-मोटी व्यवस्था की आवश्यकता है तो वह हम अपने स्तर पर पूरी करने की कोशिश करें। शिक्षा व्यवस्था में सुधार साथ ही बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, मुफ्त किताबें, गणवेश सहित अन्य सुविधाएं भी दी है। मेरा एक ही लक्ष्य है कि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बने। मेरे पास कुछ बच्चे आ कर कहते थे कि मामा हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन हमारे परिजनों के पास हमारी पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं, उन बच्चों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। पैसों की बाधा मेरे बच्चों की आँखों के सपनों के बीच नहीं आने दूँगा। 

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