आदिवासियों के नंगे पांवों को जूते-चप्पल के नाम पर सरकार ने बीमारी बाँट दी


''गरीब भोले आदिवासियों को नहीं पता था कि वे  अपने नंगे पांवों को जूते चप्पल नहीं, बल्कि एक गंभीर बड़ी बीमारी पाकर हर्षित हो रहे हैं...''

आदिवासी के पांव में कांटा क्या लगा कि सरकार ने जूते चप्पल बाँट कर भुनाने की कोशिश कर दी, लेकिन अब यह दांव उल्टा पड़ गया है. दरअसल जो जूते चप्पल सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासियों को बांटे हैं, उनमें एक इस प्रकार का रसायन पाया गया है, जो कैंसर का कारण बन रहा है. जूते चप्पल में कैंसर की खबर के बाद सरकार को जूते चप्पल वापिस लेना भी टेड़ी खीर हो गया है. एक तो इतने सारे लोगों के घर घर जाकर वापिस लेना मुश्किल है तो वहीं दुसरी ओर कैंसर बता कर वापिस लेने से आदिवासियों में नाराजगी बढ़ना तय है. 

प्रधानमंत्री मोदी भी पहना चुके हैं
आदिवासियों को बीमार करने वाले जूते-चप्पल 
तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासियों को जंगल में भटकना होता है. ऐसे में किसी प्रकार से चोटिल हो जाना स्वाभाविक है. सरकार ने समस्या को समझा और उन्हें जूते चप्पल बाँट दिए, लेकिन इसमें एक बड़ी गड़बड़ हो गई, जो जूते चप्पल उन्हें बांटे गए उनमें केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार खतरनाक रसायन मिले हैं. ये रसायन त्वचा के कैंसर का कारण बनते हैं. जांच रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि जूते-चप्पलों के इनर सोल में एजेडओ रसायन है, जिससे त्वचा कैंसर होने का खतरा बना रहता है.


अब यदि इन जूते चप्पल पहने हुए में पांव में छाला पड़ गया या किसी प्रकार से काँटा लग गया तो वह रसायन खून में चला जाएगा और कैंसर का खतरा पैदा कर सकता है. यहाँ तक की पसीने के माध्यम से भी यह शरीर में चला जाता है. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा करीब दस लाख आदिवासियों को जूते-चप्पल पहनाये गये हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते चप्पल बांटने की योजना के तहत 10 लाख आदिवासियों को ये जूते-चप्पल दे चुकी है. बताया जा रहा है कि इसके अलावा 11 लाख जोड़े अभी भी स्टॉक में रखे हुए हैं, जिन्हें कम्पनी ने वापिस लेने से इनकार कर दिया है. 

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