आईएएस आफिसर हो तो डॉ. अहमद इकबाल जैसा


मैने अपने पत्रकारिता जीवन में बहुत से आईएएस अधिकारियों को करीब से देखा है। खासकर उनकी कार्यशैली और उनके जनता के बीच के संबंधो को। ज्यादातर अधिकारी जनता के बीच न जाकर कार्यालय में फाईलों को निपटाने में प्राथमिकता देते हैं। लेकिन आईएएस और चम्पावत के जिलाधिकारी डॉ. अहमद इकबाल इन सबसे हटके हैं। वह जनता के लिए हर समय सुलभ रहते हैं। 

- आकाश नागर 
डॉ. अहमद इकबाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह असामाजिक तत्वों के खिलाफ तनकर खडे हो जाते हैं। इसकी बानगी हमने तब देखी थी, जब रानीखेत में सोनी शराब कांड में आन्दोलन किया गया था। उस समय रानीखेत के संयुक्त मजिस्ट्रेट रहे डॉ. अहमद इकबाल ने एक शराब माफिया के खिलाफ किए गए हमारे आन्दोलन को हर तरह से सपोर्ट किया। 

फिलहाल डॉ. अहमद इकबाल चम्पावत के जनता के सबसे लोकप्रिय अधिकारी बनकर उभरे हैं। मैं अपने स्थानीय पत्रकार कैलाश पाण्डेय के साथ उनके कार्यालय में बैठा था। इसी दौरान टनकपुर से एक व्यक्ति आया और उसने बताया कि वह पिछले दो साल से धर्मशाला खोलने के लिए उचित मानक जानने की कोशिश कर रहा था। जिलाधिकारी डॉ. इकबाल ने उस व्यक्ति को लिखकर पूरी जानकारी दी। 

चम्पावत के जिलाधिकारी एक मानवीय पहलू यह भी है कि वह अपनी एमबीबीएस की डिग्री का निशुल्क प्रयोग करते हैं। एक डाक्टर होने के नाते वह लोगों की समस्याओं के साथ ही उनकी बीमारियों का भी निशुल्क निदान करते हैं। ऐसे आईएएस आफिसर अगर हर जिले में होते तो आज उत्तराखंड की तस्वीर ही बदली हुई होती। हमें गर्व है डा. इकबाल अहमद जैसे आईएएस अफसरों पर।

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