सरकार की पनाह में बुनियादी शिक्षा का बंटाढार कर रहे निजी स्कूल, जानबूझकर नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़



प्रतीक चित्र सौजन्य google 
''देखा जाय तो तथाकथित निजी विद्यालय की बदनीयती एक ही नजर में साफ तौर पर सामने आ चुकी है, लेकिन जिले के शिक्षा अधिकारी जानबूझकर अपनी आँखों पर अंधत्व का चश्मा चढ़ाये बैठे हैं. और तो और ये अफसरान इतना भी नहीं जानते की 1st टू 12th स्कूल को संचालित करने किन मापदंडों पर मान्यता देनी चाहिए. होशंगाबाद जिले के एक निजी स्कूल के बारे में बेहद ही चौकाने वाला बड़ा खुलासा आपके सामने है.'' 

होशंगाबाद से बी. बी. खरे 


हाल में होशंगाबाद में स्कूल की शिक्षा व्यवस्था देखने जांच में करने पहुँचे अफसरान को इतना भी नहीं पता कि वर्षों से कितनी क्लासेस एक साथ लगती चली आ रही हैं. सब धान 12 पसेरी, 3 कक्षाओं को एक कमरे में एक समय में एक साथ एक ही टीचर एक ही ब्लैकबोर्ड पर और एक बार में.. देखिये आखिर कैसे पढ़ा रही हैं. असंभव को संभव कर देने वाली शिक्षिका को पुरुष्कृत किया जाना चाहिए. 

एक स्कूली व्यवस्था से कई मासूम बच्चे अब कंफ्यूजन में हैं और अब 1st क्लास में पहुंचे बच्चे किसी के बाप की मानने को तैयार नहीं है. इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा? आखिर मासूम बच्चे भी किस की सुनेंगे, क्योंकि ब्लैकबोर्ड पर चाक से लाईन डले तीन कालम में अलग अलग क्लास के बच्चे शुरू से एक साथ जो पढ़ते चले आये हैं. उलझन तो तब बनी जब बच्चा पास होकर अगली क्लास में आ गया. उसे तो इतना ही याद था कि ब्लैकबोर्ड का ये हिस्सा उसकी पढ़ाई के लिए है. ब्लैकबोर्ड के बाकी के हिस्से से उसे कोई लेना देना नहीं. अगली क्लास में जब बच्चे को (मेच बी कालम) यानी जोड़ी बनाने के लिए बोला गया तो उसने अपना काम पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करते हुए एक कालम में जो लिखा था उतना जस का तस उतार दिया. बाद में टीचर के लाख समझाने पर भी स्टूडेंट समझने को तैयार नहीं हुआ. इससे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है. 
  
सूत्र बताते हैं कि स्कूल में एकमात्र शौचालय है, जिसका स्कूल संचालक से लेकर स्कूल के सर, मैडम, पूरा स्टाफ उपयोग करता है. यहां यह विचारणीय है कि देश भर में शौचालयों का डंका पीटने वाली सरकार यह नहीं देख सकी कि इस स्कूल में नर्सरी से 12वी तक छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय तक अलग से नहीं हैं. साथ ही बिना टैंक का शौचालय भी आश्चर्य का विषय बना हुआ है. 

जानकारी के अनुसार वर्षों पहले शौचालय की निकासी के पाइप का संबंध भी सीधे नगरपालिका की नाली से कर दिया गया है. स्कूल में एकमात्र वाटर कूलर था, वो भी खराब होकर बदहाली पर अपने आँसू बहा रहा है. बेचारे बच्चे घर से बॉटल में पानी अपने साथ लेकर आते हैं. स्कूल में पार्किंग तक की कोई सुविधा नहीं है. स्कूली विद्यार्थियों से लेकर स्टाफ तक सभी के वाहन सड़क पर देखे जा सकते हैं, लेकिन तमाम नियम और कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए स्कूल को मान्यता प्रदान कर दी गई है. और अब समूचा शिक्षा विभाग मौन धारण कर बैठा है.

नगर में चर्चा के अनुसार हाल में हुई बच्चों की मैराथन दौड़ का बचा खुचा नाश्ता करने वाले अफसरान को इतना तक नहीं पता कि कुछ शिक्षक बेचारे गरीबी के चलते केवल 2600 में रसूखदारों की नोकरी कर रहे हैं. इतनी गंभीर अनियमितताओं को देखकर नजरअंदाज करने वाले शिक्षा अधिकारी को जिले की जनता किसी भी सूरत में पवित्र नर्मदा नगरी में भ्रष्टाचार की गंगा अवतरित करने का हक़ नहीं देगी. जनता मोर्चा खोलने की तैयारी कर रही है. सही भी है आखिर नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ होते कब तक देखते रहा जाए? 

by bmpnews24




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