चौराहे पर गायों का मजमा, जैसे वह कोई विकास की कोई योजना बना रही हों


''शाजापुर की हर गली, मोहल्ले और चौराहे पर गायों का मजमा लगा रहता है, जैसे गाय मिलकर शाजापुर के विकास की कोई योजना बना रही हों. वहीं पर खड़े खड़े गौमुत्र और गोबर का विसर्जन किया जाता है. पैदल चलना और वाहन चलाना मुश्किल हो गया है.'' 

- दीपक विभूते    
पशु पालक पता नहीं क्या सोचकर, इन गायों (राष्ट्रीय पशुओं) को सड़कों पर आम जनता को परेशान करने के लिए आवारा छोड़ देते हैं. इस बीच अगर किसी कार ने किसी राष्ट्रीय पशु को टक्कर मार दी तो गौरक्षक तुरन्त जन्म ले लेते हैं. 

लोग चर्चा करते हैं गौ माता की कोई गलती नहीं है, उन्हे शाजापुर की सड़कें देखकर अपनी गौशाला का अहसास होता होगा. लोग चटखारे लेते हैं या फिर वह शाजापुर के विकास की कोई योजना बना रही हैं, सरकार तो कोई विकास कर नहीं रही. 

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