मेडिकल कालेज भी चुनावी जुमला है



अब लगने लगा है कि चुनाव आ गये हैं, तभी सरकार और मंत्री हर वो लालीपॉप देने की जुगत में हैं, जिससे फिर 5 साल तक जनता तालिया पीटती रहे. 



- धीरज चतुर्वेदी 


छतरपुर में मेडिकल कालेज की मांग कई साल से की जा रही है, जिस पर मंत्रीजी आंदोलन से मुँह फेरती रहीं, जनता भोली है पर मुर्ख नहीं. मेडिकल कालेज की मंजूरी केंद्र सरकार से मिलती है. क्या चुनाव पूर्व ये मंजूरी मिलेगी? और क्या कालेज निर्माण के लिए बजट आबंटित होगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो क्या मेडिकल कालेज भी चुनावी जुमला है या घोषणाओं के दस्तावेजों में एक और पेज बढ़ जायेगा. मंत्री जी ने तो बिना हाथ पैर और शरीर के पुतले में जान फूकने की कहावत चरितार्थ कर पटाखे फुड़वा दिए और पोस्टर भी लगवा दिए. 

जय हो मंत्री जी, जिन्हे चुनावी लॉलीपॉप की बधाई हो. उन्हें जनता की ओर से याद दिला दें कि विश्व विध्यालय भवन की एक ईंट भी नहीं रखी गई, जबकि घोषणा हुए कई साल हो गये. मंत्री जी की एक और घोषणा के पोस्टर लगे थे, वो बाईपास रोड को लेकर. बिलकुल फर्जीवाड़ा था, जो श्रेय लूटने जैसा था. मात्र सागर रोड से पन्ना रोड के फोरलेन को मिलाने सड़क सेंशन हुई है, जबकि तब चारो ओर बायपास का ढिढोरा पीटा गया था. 




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