खूब लड़े मौत से पर अंततः हार गए अटल बिहारी वाजपेयी, आखिर मौत से कौन जीत सका है


''पिछले लम्बे समय से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बीमारी से मौत से लड़ रहे थे. कई बार उनके बारे में गलत खबर भी फ़ैली, लेकिन प्रशंसकों की दुआएं काम आईं. पर इस बार चमत्कार नहीं हो सका और हम सबके चहेते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मौत से हार गए.  आखिर मौत से कौन जीत सका है? आज उनका निधन हो गया।'' 

श्री वाजपेयी पिछले करीब दो माह से एम्स में भर्ती थे और बीते तीन दिनों से जीवन रक्षक प्रणाली वेन्टीलेटर पर चल रहे थे। कल बुधवार सवेरे से ही उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। एम्स के अनुभवी डॉक्टर लगातार उनकी देखरेख में लगे हुए थे। इसी बीच कल दोपहर बाद से ही प्रधानमंत्री मोदी समेत देश के तमाम बड़े नेता उनका हाल जानने के लिए एम्स पहुंचे।

जैसी ही अटलजी की तबीयत बिगड़ने की खबर मीडिया पर फैली, देश भर में उनके चाहने वाले और प्रशंसकों ने उनके स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना शुरू कर दी थी। इससे पहले उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय मंत्रियों सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह के एम्स पहुंचने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के 93 वर्षीय नेता के स्वास्थ्य की जानकारी ली। 1990 के दशक में वाजपेयी सरकार के दौरान उनका बखूबी साथ देने वाले साथ लालकृष्ण आडवाणी भी अस्पताल पहुंचे। 

भारतीय जनता पार्टी के 93 वर्षीय दिग्गज नेता को गुर्दे में संक्रमण, मूत्र नली में संक्रमण, पेशाब की मात्रा कम होने और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली (एम्स) में भर्ती कराया गया था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने ट्विट कर कहा है ''मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है।
हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है।''

राजनीति के गंदे कीचड़ में कमल की तरह सबसे निर्मल, पवित्र एवं अविचलित रहे श्रद्धेय राजऋषि अटलजी को कोटि-कोटि नमन ..

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