इतनी बेबस तो यह सरकार कभी नहीं दिखी


''आरक्षण इस देश और समाज की ज़रूरत है इसको लेकर मेरे मन में कोई संशय नहीं, क्योंकि वंचित वर्ग में काम करते हुए उसकी दशा को नज़दीक से देखा है, लेकिन SC-ST Act के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी उस हक़ीक़त की बयानी है जो समाज में फैली है।''



-निखिल दवे 

बात सीधी थी, अगर मामला सत्य है तो गिरफ्तारी और सज़ा होना तय है, लेकिन अगर द्वेष की भावना से प्रायोजित है तो निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन इसको आरक्षण से जोड दिया. कहा गया 'आरक्षण खत्म हो रहा है', सरकार ऐसे तत्वों के आगे झुके, उसके हिसाब से चलने लगे तो आश्चर्य होता है। इस सरकार से ही उम्मीद थी कि ऐसे तत्वों के सामने झुकेगी नहीं, कठोर निर्णय लेते इस सरकार को देखते आये, लेकिन अचानक यह?

हमने तो शाहबानो वाले मामले को तुष्टीकरण कहा और माना है, ऐसे में अब sc-st act वाले मामले को क्या कहा जाए? देश को जातिवाद के दंश से मुक्ति दिलाने वाले हिंदुत्व के नारे पर शायद वोट बैंक हावी हो गया। व्यवस्था परिवर्तन का साधन मानी जाने वाली सत्ता ही शायद अब साध्य और आराध्य है।

मैं जानता हूँ शायद यह लिख कर मुझे देशद्रोही का प्रमाण पत्र मिल जाएगा, आरक्षित वर्ग के कुछ मित्र इस कदर नाराज़ होंगे कि उलझाने के मौके बनाने लगेंगे, लेकिन फिर भी ....

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc