पत्रकारिता में पैसा कमाने की भूख ने बनाया ठग


एक युवक गोरखपुर से आकर भोपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना में लोगों को ठग रहा है. कैसे वह सीएम ऑफिस और जनसंपर्क विभाग के लिए बनी पीआर(पब्लिक रिलेशन) टीम में शामिल हो गया. और कैसे अधिमान्यता का कार्ड हासिल कर लेता है? इसकी भी जांच होनी चाहिए. पत्रकारिता पर अपना खून पसीना बहाने वाले लोग अपने पेशे पर इस तरह कलंक लगाने वालों को आखिर कब तक सहेंगे?

- नितिन दुवे/ डिजिटल इंडिया 18 न्यूज़ 
पत्रकारिता में पुराने लोगों ने बहुत संघर्ष किया है और कुछ लोग आज भी संघर्ष ही कर रहे हैं, लेकिन पिछले दस सालों से देखा जा रहा है कि नए लोग जो पत्रकारिता में आ रहे हैं, उनमें से अधिकतर को पैसा कमाने की भूख है. भोपाल में ऐसे दर्जनों पत्रकार हैं, जिन्हे मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं, जिन्होंने कभी खबर को लेकर न पैसा लिया न कोई डीलिंग की, न कोई किसी का काम कराया. वो अपनी तनख्वाह में अपने परिवार का गुजारा करते रहे और आज भी संघर्ष ही कर ही रहे हैं, लेकिन कभी अनैतिक रूप से पैसा कमाने की कोशिश नहीं की. 

यह बात मैं इसलिए लिख रहा हूं कि यह जो लड़का पुलिस ने पकड़ा है सौरभ. कई अखबारों में काम कर चुका है, रिपोर्टिंग की है. बीट देखी है. लेकिन पैसा कमाने के लिए लोगों को मकान दिलाने के नाम पर अवैध वसूली करता था, पकड़ा गया. समझना होगा कि गलत काम से कभी मंजिल हासिल नहीं की जा सकती. 

पुराने और मध्यम दौर के लोगों ने पत्रकारिता में बहुत त्याग और संघर्ष किया है और आज भी कर रहे हैं, लेकिन जो नए लोग पत्रकारिता में आ रहे हैं उनमें से अधिकतर डीलिंग कर रहे हैं, खबरों के नाम पर पैसा ले रहे हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोगों से वसूली करते हैं. उनके कारण पूरी पत्रकारिता बिरादरी बदनाम हो रही है, ऐसे लोगों पर जरूर अंकुश लगना चाहिए.

भोपाल में जो पत्रकारिता के नाम पर संगठन चल रहे हैं, उन पर भी ध्यान देने और अंकुश लगाने की जरूरत है. जो लोग पत्रकार नहीं भी होते हैं यह संगठन के पदाधिकारी मठाधीश उनको अपने संगठन का आइडी कार्ड जारी कर देते हैं और फिर वो लोग वसूली में लग जाते हैं. सरकार को भी चाहिए कि पत्रकारिता के नाम पर, जो संगठन चल रहे हैं, उनकी बारीकी से जांच हो. प्रजातंत्र में चौथे खम्ब की स्वच्छता पर ध्यान तो देना ही होगा. 

उल्लेखनीय है भोपाल में सीएम ऑफिस और जनसंपर्क विभाग के लिए बनी पीआर(पब्लिक रिलेशन) टीम में शामिल युवक को पुलिस ने धोखाधड़ी के केस में गिरफ्तार किया है. युवक ने झोपड़ियों में रहने वाले आधा दर्जन लोगों से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के मकान दिलाने का झांसा देकर 40-40 हजार रुपए हड़प लिए हैं. 

यह है पूरा मामला 
एसपी(साउथ) राहुल लोढ़ा के अनुसार एक 24 जुलाई को नूतन सुभाष स्कूल के पास रहने वाली ज्योति केवट(28) ने हबीबगंज थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. उसमें बताया कि गत वर्ष दीपावली त्योहार के समय सौरभ श्रीवास्तव नाम का युवक मिला था. सौरभ ने बताया कि वह अम्बेडकर नगर में बने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के मकान आवंटित करा सकता है. मकान की कीमत 1 लाख 45 हजार है, जिसमें से 1 लाख 10 हजार रुपए सबसिडी का लाभ मिलेगा, लेकिन शेष राशि करीब 40 हजार 500 रुपए नगर निगम के खाते में जमा करना होगा. ज्योति ने अपने परिचित ओंकार पाटिल, दिलीप सेन, राकेश सेन, लक्ष्मीबाई, किरण बाई से इस बारे में बात की. इसके बाद सभी लोग सौरभ से मिले.

बातचीत के बाद सौरभ ने सभी को पांच नंबर स्टॉप स्थित ऊर्जा विभाग के दफ्तर के पास बुलाया. वहां पर सौरभ ने नगर निगम का एक आदेश दिखाया. साथ ही कहा कि तुम सभी लोग 40-40 हजार रुपए व दो-दो फोटो व आधार कार्ड की कापी की व्यवस्था कर लो. ज्योति अपने पति के साथ 20 अक्टूबर 17 को ऊर्जा भवन के पास पहुंची. सौरभ को उसे 40,500 रुपए नगद व उसके द्वारा मांगे गए दस्तावेज सौंप दिए. सौरभ ने कहा कि पैसों की रसीद तीन-चार दिन में मिल जाएगी और पंद्रह दिन में मकान मिल जाएगा. तीन दिन बाद सौरभ ने ज्योति को नगर निगम की लिखी रसीद थमा दी. इसी तरह रुपए लेने के बाद सौरभ ने अन्य लोगों को भी रसीद दी. 

रजिस्ट्री कराने के नाम पर भी सौरभ ने उन लोगों से करीब 3 हजार रुपए लिए. पंद्रह दिन बीतने के बाद भी मकान नहीं मिलने पर वे लोग सौरभ से मिले, तो थोड़ा और इंतजार करने को कहता रहा. शक होने पर फरियादी नगर निगम के दफ्तर पहुंचे और सौरभ द्वारा दी गई रसीद दिखाई. तब वहां पता चला कि रसीद फर्जी है. ज्योति की शिकायत पर हबीबगंज पुलिस ने सौरभ श्रीवास्तव के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया.

मूलतः गोरखपुर के रहने वाला युवक सौरभ श्रीवास्तव (35) भोपाल में अवधपुरी इलाके में रह रहा था. वह मुख्यमंत्री के लिए बनाई गई पीआर टीम में काम कर रहा था. उसके पास जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी अधिमान्यता कार्ड भी मिला है. सौरभ कंप्यूटर से नगर निगम के सरकारी आदेश को इंटरनेट के माध्यम से डाउनलोड कर इनवाइस मेकर से फर्जी रसीद व आदेश बनाकर लोगों को देता था. सौरभ के खिलाफ टीटी नगर थाना में भी धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है.

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