बेचारे मेरे अखबार मालिक और मैनेजमेंट को क्यों धमका रहे हो नेताजी?


इसे कहते हैं निडर निर्भीक पत्रकारिता. भोपाल के पत्रकार नितिन दुबे ने अपनी बात सोशल मीडिया पर कुछ इस प्रकार शेयर की है. 

उन्होंने लिखा है ''लगातार भ्रष्ट नेताओं पर लिखने का असर मेरे अखबार मालिक और मैनेजमेंट पर भी अब पड़ने लगा है. नेता जी मेरा आपसे निवेदन है कि क्यों उन गरीब अखबार मालिकों को परेशान कर रहे हो, बेचारे रोजी रोटी कमाने के लिए यहां आए हैं और अखबार निकाल कर अपना और अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं. मैं आपके खिलाफ लिख रहा हूं. आप मुझे धमकाओ.''

उन्होंने लिखा है ''दरअसल मैं भ्रस्ट नेताओं के खिलाफ लिख रहा हूं वो फोन करके मेरे अखबार मालिक और मैनेजमेंट को धमका रहे हैं कि नितिन दुबे को तत्काल अखबार से बाहर निकाल दो. वैसे यह मेरे लिए नया नहीं है. 20 साल से मैं यही सब झेल रहा हूं. तीन बार पहले भी मेरे साथ यह हो चुका है.'' 

उन्होंने लिखा है ''प्रदेश टुडे, पीपुल्स समाचार और दबंग दुनिया से इन्हीं नेताओं ने मेरी विदाई करवाई थी. इनमें से दो अखबार मालिकों को एक दिग्गज नेता ने फोन करके धमकाया था कि नितिन दुबे को तत्काल नौकरी से हटाओ. विज्ञापन बंद करवा देंगे. अब फिर धमकाने लगे हैं बेचारों को.'' 

उन्होंने अंत में लिखा है ''नेता जी मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि जो भी धमकी ममकी देना हो, हमला करवाना हो, मेरे साथ सीधे करो. मेरे अखबार मालिकों का दिल बहुत छोटा है, डर जाते हैं बेचारे.'' साथ ही उन्होंने साफ़ कर दिया है कि आगे भी ''मैं सदैव ऐसे ही आपके खिलाफ़ लिखता रहूंगा.''

(डिजीटल न्यूज़ सर्विस नेटवर्क )
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