मध्यप्रदेश सरकार का खजाना खाली, वित्तीय प्रबंधन में अराजकता का माहौल




''मध्यप्रदेश को 5 बार कृषि कर्मण अवार्ड मिलने के बाद भी मध्यप्रदेश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। भावांतर योजना भंवर में डूब गई है। कुल जमा कहानी यह है कि सरकार का खजाना खाली है। खाली खजाने के बाद मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा 14 जुलाई से उज्जैन से शुरू हो चुकी है। यात्रा के लिए ढाई करोड के विशेष रथ बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश के खाली खजाने पर घोषणाएं और यात्राओं का सिलसिला अनवरत जारी है।''

   
    
- राम मोहन चौकसे 

ध्यप्रदेश में पिछले 15 साल से कबिज भाजपा शासित सरकार सत्ता मध्य में बौरा गई है। वित्तीय प्रबंधन में अराजकता का माहौल पैदा हो गया है। मध्यप्रदेश सरकार का खजाना खाली हो गया है। मध्य प्रदेश सरकार पर 1.8 3 लाख करोड़ का कर्ज है। आगामी विधानसभा चुनाव नवंबर 2018 में होने जा रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव तक कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ जाएंगे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लाखों, करोड़ों रुपए की योजनाएं शुरू करने की घोषणा करने में मैराथन दौड़ रहे हैं। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कार्यकाल के अंतिम चरण में उनकी कार्यशैली को देख कर नौकरशाह और आम आदमी हतप्रभ है। आम आदमी को चिंता सता रही है कि दोनों हाथों से खजाना उलीचने से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के वेतन के लाले भी पड़ सकते हैं। सरकार हर दूसरे दिन किसी नई योजना की घोषणा कर देती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी टीकमगढ़ जिले की निवाड़ी तहसील को नया जिला बनाने, सागर विकास प्राधिकरण का गठन करने, गरीबी रेखा के नीचे यापन करने वाले श्रमिकों के बिजली बिल माफ करने, हर माह 200 रुपये फ्लैट रेट से बिजली देने, अगले 4 साल में गरीबों को 40 लाख मकान बनाकर देने सहित कई घोषणा की हैं। इन सभी योजनाओं को लागू करने में फिर से करोड़ों रुपए खर्च होंगे। 

मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना के तहत सरल बिजली योजना और मुख्यमंत्री बकाया बिल माफी योजना भी बनाई गई है। सिर्फ इतना ही नहीं श्रमिकों के लिए करोड़ों रुपए का खजाना खोल दिया गया है। प्रदेश में श्रमिकों के पंजीकरण के लिए पूरे प्रदेश में नगरीय निकायों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। पंजीकृत श्रमिकों का निशुल्क इलाज किया जाना तय हो रहा है। महिला श्रमिकों को बच्चों के जन्म के पहले 4000 दिए जाएंगे। प्रसव के बाद 12000 दिए जाएंगे। श्रमिक के दुर्घटना में मरने पर 4 लाख मृतक के परिजनों को मिलेंगे। अंत्येष्टि के लिए 5000 अलग से दिए जाएंगे। इस योजना के लागू होने पर प्रदेश में खेती, निर्माण कार्य, उद्योग तथा लघु उद्योग में काम करने के लिए बाजार में श्रमिक नहीं मिलेंगे। श्रमिकों का पंजीकरण होने के बाद श्रमिक के बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मकान मिलने पर श्रमिक मजदूरी करना पसंद नहीं करेगा। मध्य प्रदेश में गरीबों के लिए 2 किलो चावल 1 किलो गेहूं पहले से ही दिया जा रहा है। 

केंद्र सरकार मनरेगा योजना पहले ही संचालित है। इस मनरेगा योजना के अंतर्गत 365 दिनों में प्रति व्यक्ति को सौ दिन का रोजगार दिए जाना अनिवार्य है। अब श्रमिक को 200 में बिजली के साथ सब कुछ मुफ्त मिलने पर बाजार में श्रमिकों का अकाल पड़ेगा। सरकारी खजाना खाली होने का अंतहीन सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। मध्य प्रदेश में असंगठित श्रमिक को का पंचायत स्तर पर पंजीकरण अनिवार्य किए जाने के बाद बिचौलिये भी इस योजना का लाभ लेने के लिए सक्रिय हो गए हैं। पक्के मकान में रहने वाले आयकरदाता, चार पहिया वाहन मालिक, तथाकथित पत्रकारों ने फर्जी तरीके से असंगठित श्रमिकों के नाम पर पंजीयन कराना शुरू कर दिया है। आर्थिक रुप से संपन्न लोग प्रतिमाह 200 बिजली बिल भुगतान करने के लिए श्रमिकों के नाम पर फर्जी पंजीयन से नहीं चूक रहे हैं।

मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना , वन बस्टॉप सखी योजना, पालन पोषण देखरेख योजना इंदिरा गांधी मातृत्व योजना, सुपोषण योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन योजना, पेंशन योजना,राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना,मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री सहायता योजना, मध्यप्रदेश राज्य बीमारी सहायता योजना, मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान निकाह योजना, मुख्यमंत्री मजदूर योजना,अंत्येष्टि सहायता योजना, मध्यप्रदेश राज्य बीमारी सहायता निधि योजना,जननी सुरक्षा योजना,निशुल्क साइकिल प्रदाय योजना, सुदामा शिष्यवृत्ती योजना, विद्यार्थियों को स्मार्टफोन प्रदाय योजना सहित एक दर्जन अन्य योजनाएं हैं, जिसमें सरकार को अपने खजाने से हर महिना लाखों रुपए देना है।

मध्य प्रदेश में जहां एक और लाखों रुपए दर्जनों योजनाओं पर खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर पूरे देश में अव्वल है। प्रदेश के 70 फ़ीसदी बच्चों में खून की कमी है। 45 फ़ीसदी बच्चे कुपोषित हैं। शिक्षा के अधिकार कानून का मध्यप्रदेश में पालन नहीं हो रहा है। 6 साल बाद भी लक्ष्य की पूर्ति नहीं हो रही है। 2010 से 2016 के बीच 7284 करोड़ का बजट जारी नहीं किया गया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार जो बजट जारी हुआ। उसमें 1200 सौ करोड़ खर्च नहीं किए गए। चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में 84 फ़ीसदी बच्चे आठवीं की पढ़ाई के बाद 1 से 9 तक की अंक नहीं पहचानते हैं। 51 फीसदी बच्चे हिंदी नहीं लिख पाते हैं। 75फीसदी प्राथमिक स्तर पर वर्णमाला नहीं जानते हैं। मध्यप्रदेश को 5 बार कृषि कर्मण अवार्ड मिलने के बाद भी मध्यप्रदेश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। भावांतर योजना भंवर में डूब गई है। कुल जमा कहानी यह है कि सरकार का खजाना खाली है। सरकार अब विधानसभा सत्र बुलाकर अनुपूरक बजट भी पारित नहीं कर सकती है। विधानसभा का कोई सत्र अब नहीं होना है। खाली खजाने के बाद मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा 14 जुलाई से उज्जैन से शुरू हो चुकी है। इस यात्रा के लिए ढाई करोड के विशेष रथ बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश के खाली खजाने पर घोषणाएं और यात्राओं का सिलसिला अनवरत जारी है।

*लेखक मध्यप्रदेश के वरिष्ठ एवं राज्य स्तरीय अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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