राजधानी पानी पानी, धरना और प्रशासन को कोस कर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते महापौर





''भोपाल के अधिकतर नाले उफान पर हैं, सड़कें डूबी हैं, नालियां नदारद हैं. शहर की समस्या के लिए आखिर जिम्मेदार नगर निगम ही होता है. लोग सवाल कर रहे हैं नम्बर वन का श्रेय लेने में तो नगर निगम आगे रहता है, लेकिन जब समस्या आई तो कोई और कैसे जिम्मेदार हो गया?''

- रोशन नेमा    



पहली ही बारिश ने राजधानी भोपाल में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति पैदा कर विकास की पोल खोल कर रख दी. लोगों का गुस्सा फूटा तो शहर के महापौर पानी के बीच कुर्सी जमा कर धरना पर बैठ गए, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ. बजह साफ़ साफ़ यह है कि आप पानी के बीच धरना और प्रशासन को कोस कर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते.

भोपाल में पिछले 2-3 दिनों से लगातार तेज बारिश हो रही है. ऐसे में शहर के कई इलाकों में पानी भर गया. राजधानी के पाश इलाके तक अछूते नहीं रहे हैं. चार इमली, चूना भट्टी, शाहपुरा, गुलमोहर, कोलार रोड, दानिश, बैरागढ़ सहित उत्तर भोपाल के अधिकतर नाले और ढलान वाले क्षेत्र उफान पर हैं, सड़कें डूबी हैं, नालियां नदारद हैं. उनका पानी सड़कों से होते हुए लोगों के घरों तक पहुंच रहा है. ऐसे में लोगों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है. शहर की समस्या के लिए आखिर जिम्मेदार नगर निगम ही होता है. लोग सवाल कर रहे हैं नम्बर वन का श्रेय लेने में तो नगर निगम आगे रहता है, लेकिन जब समस्या आई तो कोई और कैसे जिम्मेदार हो गया?
भारत टाकीज चौराहे पर बरसात के पानी निकासी का अवलोकन या अपने कामों की समीक्षा?

महापौर आलोक शर्मा ने खुद धरने पर बैठ कर यह जताने का प्रयास किया कि वे तो नागरिकों के साथ हैं, उनकी समस्याओं पर गंभीर हैं, यहाँ तक की पानी के बीच बैठकर धरना देने में भी कोई देर नहीं लगाई. पर सवाल यह भी है कि यह सब पहले से नहीं दिख रहा था क्या? और क्या पीडब्ल्यूडी ने बिना नगर निगम की सहमति के पुल बनाया?

दरअसल भोपाल के महापौर आलोक शर्मा का कहना है कि सेफिया कॉलेज के पास से गुजर रहे नाले पर पीडब्ल्यूडी का पुल है. इस पुल के कारण नाले का पानी बाधित हो रहा है और पानी सड़कों पर बह रहा है. लोगों के घरों में पानी घुस गया है. पीडब्ल्यूडी के अधिकारी इस नाले को लेकर कोई कदम नहीं उठा रहे, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 



पीडब्ल्यूडी का गैर जिम्मेदाराना रवैया -महापौर आलोक शर्मा     
महापौर आलोक शर्मा का कहना है कि 'पीडब्ल्यूडी विभाग के गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण समस्या पैदा हुई. उन्होंने कहा कि भोपाल के कई इलाकों में हर बार जलभराव की स्थिति बनती है. लोग हर बार नगर निगम को जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि यहां विकास कार्यों के लिए कई एजेंसियां हैं, ऐसे में समन्वय की कमी से ऐसी स्थिति बनती है.' 

दबंगों के नालों पर अतिक्रमण से घरों में पानी भरा, सुनने को तैयार नहीं
ग्राम गुराड़ी वार्ड 84 जोन 19 में भी नालों पर अतिक्रमण के चलते लोगों के घरों में पानी भर गया. यहाँ दबंगों ने पहले नालों पर अतिक्रमण किया, जिसके चलते लोगों के घरों में पानी भर गया. रात से ही सभी परेशान थे. लोगों ने जब दबंगों से बात करनी चाही तो उन्होंने महिलाओं और बच्चों को मारा. सभी पीड़ित तत्काल ट्रैक्टर ट्रॉली से कलेक्टर कार्यालय भोपाल पहुंचे. नगर निगम आयुक्त या महापौर कोई सुनने को तैयार नहीं है. 

राजनेताओं को ड्रामा करने की आदत होती है
मामले पर आरटीआई एक्टिविस्ट अजय पाटीदार का कहना है 'ऐसी परिस्थिति में राजनेताओं को ड्रामा करने की आदत होती है. जो व्यक्ति स्वयं महापौर है, जिसके पास समस्त शासकीय कार्यकारी शासन एवं प्रशासन है, वो पानी में धरने पर बैठकर जनता को ड्रामा दिखाता है.'





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