चुनाव होते तो पोल खुल जाती, इसलिए टाले गए मंडी समितियों के चुनाव - कमलनाथ


सरकार की भावान्तर या कोई भी योजना का वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है. किसानों के नाम पर चल रही सारी योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है. प्रदेश भर की मंडियों में फसल बेचने के लिए किसानों को जमकर परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई किसानों की फ़सल बेचने के इंतज़ार में मौत हो गयी. यही कारण है कि यदि मंडी समितियों के चुनाव होते तो सरकार की हकीकत सबको पता चल जाती, जो कि आने वाले विधान सभा व्हुनाव में हानिकारक होती इसलिए मंडी समितियों के चुनाव टाले गए हैं. यह कहना है कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का. 

कमलनाथ ने कहा है कि शिवराज अपने आप को किसान पुत्र कहते हैं, उन्हें तो मंडी चुनाव से भागने के बजाय उसका सामना करना चाहिए. मंदसौर की पीपलियामंडी में किसान अपने हक़ को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, तो उनके सीने पर गोलियाँ दागी गयीं. दोषियों को सज़ा मिलने की बजाय, उन्हें क्लीनचिट दे दी गयी. दोषी अफसरो को तुरंत बहाल कर दिया गया. मंडी चुनाव होते तो किसान, सीने पर गोली का बदला वोट से लेते. इस बार भी अपने हक़ को लेकर आंदोलन कर रहे किसानो को जमकर डराया धमकाया गया. उन्हें आँसू गैस से लेकर डंडों का डर दिखाया गया. उनसे शांति भंग के बांड भरवाए गये. किसान बेहद अक्रोशित हैं. इन सब बातों से ही डरकर सरकार ने चुनाव टाल दिये, क्योंकि यदि 

चुनाव होते तो हकीकत सामने आ जाती. उन्होंने कहा सरकार की भावांतर योजना का वास्तविक लाभ किसानों को न होकर व्यापारियों को हुआ. किसानों के नाम पर चल रही सारी योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार किया गया. प्रदेश भर की मंडियों में फसल बेचने के लिए किसानों को जमकर परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई किसानो की फ़सल बेचने के इंतज़ार में मौत हो गयी. 

उन्होंने कहा कर्ज से परेशान होकर प्रतिदिन किसान आत्महत्या कर रहे हैं और मुख्यमंत्री कहते हैं कि किसानों के लिए हमारी सरकार ने सबसे ज्यादा काम किया है. यदि ऐसा है तो उन्हें मंडी समितियों का कार्यकाल आगे बढ़ाने की बजाय, चुनाव कार्यक्रम घोषित करवाना था, जिससे उनको व उनकी सरकार को सारी वास्तविकता पता चल जाती.

(डिजीटल न्यूज़ सर्विस नेटवर्क )
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