जनसुनवाई में तहसीलदार ने बाबू के जड़ दिए तमाचे, बाबू ने भी जड़ दिया




खंडवा में मंगलवार को जन सुनवाई में जब तहसीलदार और बाबू के बीच कहा सुनी हुई और जब तहसीलदार को बाबु पर गुस्सा आया तो जन सुनवाई थप्पड़ों से गूँज उठी. कहा सुनी के बाद तहसीलदार गुस्से में आपा खो बैठे और सामाजिक कल्याण एवं न्याय विभाग के बाबू को सार्वजनिक तौर पर तमाचा जड़ दिए. इस दौरान जनसुनवाई में मौजूद सैकड़ों लोग की भीड़ जमा हो गई. SDM ने मामला शान्त शांत करा दिया है, लेकिन मामले को लेकर प्रदेश भर के बाबुओं में आक्रोश है. 

खंडवा कलेक्ट्रेट में विकलांगों के लिए लगाए गए जनसुनवाई टेबल पर एक पेंशन के हितग्राही ने अपनी समस्या बताई तो तहसीलदार प्रताप सिंह अगासिया ने उसी टेबल पर मौजूद सामाजिक एवं न्याय विभाग के बाबू एम के अग्रवाल को उसका निराकरण करने को कहा. बाबू ने इसमें असमर्थता जताई. बार-बार कहने के बावजूद भी जब बाबू ने उसका निराकरण नहीं किया तो गुस्से में तमतमाए तहसीलदार प्रताप सिंह अगासिया ने खड़े होकर बाबू एम के अग्रवाल को 2- 3 तमाचे जड़ दिए. 

'होगा घर का तहसीलदार', बाबू ने भी तहसीलदार को जड़ दिया थप्पड़ 
इतना ही नहीं तहसीलदार और बाबू में काफी देर तक विवाद भी होता रहा. बताया यह भी जा रहा है कि 'होगा घर का तहसीलदार' कहते हुए बाबू ने भी तहसीलदार को थप्पड़ जड़ दिया. बाद में SDM ने बाबू को हाथ पकड़कर जनसुनवाई से बाहर कर दिया. 

मामले पर तहसीलदार का कहना है कि बाबू उनकी बात को बार-बार टाल रहा था, जबकि बाबू ने कहा कि मेरे पास सिर्फ विकलांगों के आवेदन का चार्ज था, जबकि आवेदक पेंशन की समस्या लेकर आया था, जिसका टेबल अलग जगह लगाया गया था.  सवाल है जनसुनवाई में जब अधिकारी और कर्मचारी आपस में इस तरह से लड़ने लगेंगे तो आम लोगों की समस्याओं का क्या होगा?




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