हजारीबाग में बुराड़ी जैसी घटना, नोटबन्दी और GST ने भी निभाई भूमिका


''झारखंड के हजारीबाग में दिल्ली के बुराड़ी जैसी घटना सामने आयी है. यहां एक ही परिवार के 6 लोगों ने आत्महत्या कर ली है. घटना ने इलाके के लोगों को हिला कर रख दिया है.'' 

- गिरीश मालवीय   

हजारीबाग के महावीर माहेश्वरी ने परिवार समेत आत्महत्या कर ली. जानकारी के मुताबिक परिवार कर्ज से परेशान था. परिवार में कुल 6 सदस्य थे इनमें 2 लोगों ने फांसी के फंदे पर लटक कर जान दे दी. 1 बच्चे की धारदार हथियार से हत्या कर दी, जबकि 1 बच्ची को जहर देकर मारा गया. एक महिला को गला दबाकर मार दिया गया तो एक ने छत से कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. फिलहाल पुलिस मामले में जांच कर रही है. 

पुलिस को घटनास्थल से एक लिफाफा मिला है, जिस पर सूसाइड नोट लिखा हुआ है. इसमें खुदकुशी को गणित के 'सूत्र' के तौर पर समझाते हुए लिखा गया है, 'बीमारी+दुकान बंद+ दुकानदारों का बकाया न देना+ बदनामी+ कर्ज= तनाव → मौत.' मामला हजारीबाग के खजांची तालाब के निकट सीडीएम अपार्टमेंट का है. जांच में मामला आत्महत्या का माना जा रहा है, लेकिन पुलिस हत्या की आशंका से भी इंकार नहीं कर रही है. 

बताया जाता है कि पूरा परिवार काफी सीधा और स्वभिमानी था. ड्रायफ्रूट्स का व्यवसाय काफी फैला हुआ था. एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक की रकम मार्केट में फंसी हुई थी. बाजार से रिटर्न नहीं मिलने की वजह से व्यवसायी परिवार पेमेंट नहीं कर पा रहे थे.

मित्र असित कुमार नाथ बता रहे हैं कि 'महावीर महेश्वरी के चचेरे भाई के मुताबिक नोटबंदी के बाद इनका बहुत सारा पैसा बाजार में फंस गया. ऐसी कई छोटी दुकानें बंद हो गईं जिनमें इनके यहां से माल जाता था, जिनकी दुकानें बंद हुईं, उनमें से कुछ लोगों के यहां से तो रिकवरी हो पाई, लेकिन, ज्यादातर लोगों से रिकवरी नहीं हो पाई थी. क्योंकि उनके पास देने को कुछ बचा ही नहीं था. कारोबार जिंदा रखने के लिए महावीर महेश्वरी ने उधार और कर्ज लिया, जो अब वो चुका नहीं पा रहे थे. कर्ज की वजह से सामाजिक प्रतिष्ठा गिरती जा रही थी. लिहाजा पूरा परिवार दुनिया को अलविदा कह गया.'

अब इस केस में नोटबन्दी की भूमिका साफ नजर आती है. हर शहर के छोटे बड़े खुदरा व्यापार में लगे व्यापारी को नोटबन्दी और विचित्र प्रकार की GST लागू होने के बाद अपने व्यापार में चोट पुहंची है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह ऐसा रास्ता ही अख्तियार कर लें.

पिछले दिनों उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी के संत नगर इलाके में एकसाथ 11 शव मिले थे, लेकिन उसको लेकर मीडिया में एक विशेष किस्म का उत्साह देखने मे आ रहा था, वह यहाँ इस घटना ने देखने में नहीं आएगा, क्योंकि बात कहीं न कहीं नोटबन्दी की जरूर निकलेगी.

वैसे बुराड़ी केस पूरा अंधविश्वास पर टिका हुआ था, इसलिए उसके किस्से रस ले ले कर बताए गए, और मृतक परिवार की मूर्खता को जम कर कोसा गया और ब्रेक के बाद यह भी बताया गया कि शिरडी में किसी मन्दिर पर साईं बाबा की तस्वीर उभर रही है और पूरी के जगन्नाथ जी की ज्यादा आमरस पीने से तबियत खराब हो गयी है, क्या ये बातें अंधविश्वास को नहीं बढ़ाती?

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