लोग क़ानून हाथ में क्यों ले रहे हैं, मनन करे सरकार



''इन दिनों जो देश में रेप के केसेस बेतहाशा बढ़ रहे हैं, किसान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं, लोग मानसिक अवसाद का जीवन जी रहे हैं. लोगों को जीवन जीने की प्रेरणा देने वाले प्रवचन देने वाले भय्यूजी महाराज जैसे लोग आत्महत्या कर रहे हैं. इस सबके पीछे कहीं न कहीं सरकारी नीतियां ही जिम्मेदार हैं.''

- मदन राम    

देश में शहरों की साज सज्जा पर पर करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन उन्ही शहरों में कई लाखों की मूर्तियों के नीचे आम आदमी की यह हालत है. फिर सरकार कहती है लोग नक्सली बन रहे हैं. क़ानून अपने हाथ में ले रहे हैं. क़ानून अपना काम नहीं करेगा, तो लोग नक्सली बनेंगे ही. 

हाल में उज्जैन के महाकाल मंदिर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शिवलिंग पर केवल RO का पानी ही चढ़ाया जाएगा. इसके पीछे शिवलिंग के घिसने की वजह बताई गई है. अब देखिये जिस देश में हालात इतने बदतर हों, लोग गटर का पानी पीने मजबूर हों, वहाँ सुप्रीम कोर्ट का यह वक्तव्य कि शिवलिंग पर RO का पानी चढ़ेगा, वाह क्या न्याय है? ऐसे काम सरकार करे समझ में आता है कि वोटों के लिए किया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट करने लग जाए, तब कहने के लिए क्या शेष रह जाता है..

इन दिनों जो देश में रेप के केसेस बेतहाशा बढ़ रहे हैं, किसान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं, लोग मानसिक अवसाद का जीवन जी रहे हैं. लोगों को जीवन जीने की प्रेरणा देने वाले प्रवचन देने वाले भय्यूजी महाराज जैसे लोग आत्महत्या कर रहे हैं. इस सबके पीछे कहीं न कहीं सरकारी नीतियां ही जिम्मेदार हैं. सरकार को इन बातों की जिम्मेदारी लेते हुए आवश्यक सुधार करना चाहिए, लोगों को ही जिम्मेदार ठहरा कर दूर भागना पूरी तरह सरकार की गैरजिम्मेदारी ही कहा जाएगा. 

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