आरक्षण : शक के दायरे में सरकार


''मुंह में राम बगल में छुरी बाबा तेरी नियत बुरी, आरक्षण की बात करें तो मोदी सरकार कुछ इसी प्रकार से चल रही दिख रही है.'' 

प्रधानमंत्री भले ही यह भरोसा दिला रहे हों, कि आरक्षण कोई खत्म नहीं कर सकता, लेकिन उनके ही कई मंत्री पार्टी पदाधिकारी नेता अक्सर आरक्षण के खिलाफ बोलते नजर आते रहते हैं. उनके इर्द गिर्द के लोग ही अक्सर आरक्षण पर ऊँगली उठाते रहते हैं. इससे यह पता चल जाता है कि दिल में कुछ और चल रहा है. इन्हीं कारणों से सरकार शक के दायरे में बनी हुई है. यही कारण है कि एक बार फिर हाल में ABP news पर सूत्रों के हवाले से बताई गई खबर कि सरकार सभी जातियों में आरक्षण को आर्थिक आधार पर करने पर विचार कर रही है, सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हो रही है.  

आरक्षण पर लम्बे समय से विवाद चला आ रहा है. पिछले कुछ दिनों से कुछ ज्यादा ही चर्चा हो रही है. जैसे जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, आरक्षण का जिन्न भी बाहर निकल रहा है. वैसे सूत्रों की बात मानने योग्य इसलिए भी है कि पूर्व में कई अवसरों पर कई मंत्री इसकी वकालत करते नजर आ चुके हैं. 

लेकिन वोटों का गणित सरकार के सामने आ खड़ा होता है और फिर वह इसी गुणा भाग में लग जाती है. गरीबों पिछड़ों को मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण लाया गया था. समानता के अवसर सबको मिलना चाहिए. वर्षों पूर्व जाति विशेष के साथ जो भी गलत होता रहा, उसे आज कोई भी सही नहीं ठहरा सकता, लेकिन आज भी कई बार वही गलतियां दोहराई जाती दिखती हैं. ऐसे में आर्थिक आधार पर आरक्षण होता है तो सवाल लाजिमी है कि जब जातिगत आरक्षण के इतने सालों बाद भी आरक्षित वर्ग की दशा नहीं सुधारी जा सकी, तो इसके बाद तो वह भूल ही जाएँ कि उन्हें कभी कोई बराबर का हक़ मिलेगा. 

असल में जातिगत आरक्षण के कारण एक बार जो लाभ ले लिए वही आगे भी लेते रहे और शेष लाइन में लगे ही रह गए. आरक्षित वर्ग के जो लोग लाइन में लगे ही रह गए. इस पर कभी कुछ नहीं सोचा गया. यही कारण है कि इतने साल बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, बल्कि अब और ज्यादा विकराल रूप में है. 

हाल में लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी) नेता और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने समृद्ध दलितों से स्वेच्छा से आरक्षण छोड़ देने की अपील की. उन्होंने कहा कि दलितों के समृद्धशाली तबके को उसी तरह आरक्षण त्याग देना चाहिए, जिस तरह देश के संपन्‍न लोग गैस सब्सिडी का त्‍याग कर रहे हैं. उनका कहना था कि इससे इस समुदाय के बाकी लोगों को आगे बढ़ने के और बेहतर करने के अवसर मिलेंगे, जिन्हें आरक्षण की सही मायने में जरूरत है. हालांकि चिराग ने ये भी कहा कि इसे कानून बनाकर नहीं, बल्कि लोगों को जागरुक कर प्रोत्साहित करना चाहिए. एलजेपी सांसद चिराग ने खुद को ‘जातिविहीन’ समाज के पक्ष में बताया.

वहीं उनके पिता लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख और बीजेपी सरकार में केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान भी कहते हैं कि ऊंची जाति के गरीबों को भी आरक्षण मिलना चाहिए. उनका कहना है कि वर्ष 2000 में जिस दिन से हमारी पार्टी बनी है, हम मांग कर रहे हैं कि 15 प्रतिशत आरक्षण ऊंची जाति के गरीब लोगों को मिलना चाहिए. हमने कहा था कि अगर आपको जाति व्यवस्था खत्म करनी है तो अंतर जातीय विवाह में भी आरक्षण कर सकते हो. 

यह सब दिखता बहुत सरल है पर राजनीति को कहाँ ले जाएँ. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निजी क्षेत्र में भी 50 फीसदी आरक्षण का मुद्दा उठाया, तो बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे तत्काल कोरी बयानबाजी बता दिया. उनका कहना एक प्रकार से सही भी है जब नीतीश अपने स्तर पर कुछ कर रहे तो वह ऐसा राजनीति के तहत ही तो कह रहे हैं. मायावती ने कहा कि बिहार में भाजपा के साथ सत्ता में बैठे लोगों को केंद्र में अपनी गठबंधन सरकार से निजी क्षेत्र में आरक्षण की केवल मांग करने की बजाय सीधे आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए. मायावती की यह बात बहुत हद तक सही देखने में आ रही है कि कोरी बयानबाजी करके मीडिया में केवल सुर्खियां बटोरकर सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए यह मुद्दा उछाला जाता रहता है. 

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य आरक्षण की समीक्षा की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि डॉ. अंबेडकर ने कहा है कि किसी भी राष्ट्र में हमेशा के लिए आरक्षण का प्रावधान रहना अच्छा नहीं है, जल्द से जल्द से इसकी आवश्यकता निरस्त कर सबको समान अवसर देने का समय आना चाहिए. उनके अनुसार हमेशा के लिए आरक्षण अलगाववाद बढ़ाने वाली बात होगी.

राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा है कि आरक्षण को पूरी तरह खत्म करना पागलपन होगा, लेकिन हमारी सरकार आरक्षण को उस स्तर पर पहुंचा देगी, जहां उसका होना या नहीं होना बराबर होगा. यानि आरक्षण को निरर्थक कर दिया जाएगा.

वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कह रही हैं कि भाजपा आरक्षण ख़त्म करने के चक्कर में है. उनका कहना है अगर आरक्षण खत्म हुआ तो भाजपा राजनीति ही भूल जाएगी. आरक्षण के मामले में भाजपा व आरएसएस की मानसिकता खुलकर सामने आ गई है. आरक्षण दलितों और पिछड़ों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे भाजपा तो क्या, कोई भी नहीं छीन सकता. बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है भाजपा ने आरक्षण छिनने का प्रयास किया तो उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरक्षण पर दो टूक कह चुके हैं कि पिछड़े तबके और दलितों को आरक्षण पर कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा है कि राजनीतिक वजहों से विपक्ष ऐसी झूंठ बातें उड़ा रहा है. 

पर भले ही प्रधानमंत्री यह भरोसा दिला रहे हों, लेकिन उनके ही कई मंत्री पार्टी पदाधिकारी नेता अक्सर आरक्षण के खिलाफ बोलते नजर आते रहते हैं. मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भले यह कहते हों कि कोई माई का लाल आरक्षण ख़त्म नहीं कर सकता, लेकिन उनके इर्द गिर्द के लोग आरक्षण पर ऊँगली उठाते रहते हैं. इससे यह पता चल जाता है कि दिल में कुछ और चल रहा है. 

पिछले दिनों मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने खुले तौर पर आरक्षण पर सवाल उठाए. उनका मानना है कि ब्राह्मणों में प्रतिभा अधिक होती है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारी ब्राह्मण जाति से होना चाहिए. उनके अनुसार ऐसा न होना प्रतिभा का अपमान है. मंत्री ने 'योग्य लोगों पर अयोग्य लोगों' को बैठाए जाने की बात कहते हुए इसे 'अनीति का कार्य' बताया है. हालांकि उनके इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने एक लिखित विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया. मध्यप्रदेश में ही राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त रमेशचंद्र शर्मा के दो तरफ़ा बातों के लिए उनके साथ काफी बदतमीजी करते हुए वीडियो वायरल हुआ. 

अंत में    
सामान्य वर्ग की अपनी समस्या है. उनके अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक को बिना भेदभाव के उन्नति का समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन क्या करें राजनीति सबसे पहले जरूरी है. गुणा भाग तो लगाया ही जाएगा. हालांकि सरकार को यह अवश्य समझना चाहिये कि दो नाव की सवारी कभी भी अच्छी नहीं होती. 

- चित्रांश  

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