भ्रष्टाचार में जीरो टॉलरेंस के लिए बना नया क़ानून, देने वाला ज्यादा सजा का हकदार


''संसद में आज भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक 2018 बिना कोई चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. इसके अनुसार अब भ्रष्टाचार की शिकायत करना महंगा सौदा हो जाएगा.'' 

नए क़ानून के तहत रिश्वत लेने वाले अधिकारी को 3 साल की जेल का प्रवाधान है, परंतु अब संशोधन के बाद रिश्वत देने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी और उसे 7 साल जेल का प्रावधान कर दिया गया है.

भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधित) विधेयक 2018 पेश करते हुए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि विधेयक उन अधिकरियों को सुरक्षा प्रदान करेगा, जो अपना कार्य ईमानदारी से करते हैं. उन्होंने कहा कि विधेयक में भ्रष्टाचार के मामलों में शीध्र सुनवाई सुनिश्चित करने का प्रावधान है. मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस के प्रति बचनबद्ध है. विधेयक में रिश्वत लेने के दोषियों पर जुर्माने के साथ साथ देने वाले पर भी कार्यवाही होगी तो निश्चित ही भ्रष्टाचार के मामले सामने ही नहीं आयेंगे और जीरो टॉलरेंस स्थिति हो जायेगी. 

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