मेरी डायरी से 'मेरे अनकहे जवाब..'




सुनो 
पुराने घर में रखी वह
संदूकची
मुझे देख आज भी
खनकाती है सांकल
यादों की

और मैं खिसका देती हूँ
उसे कोने में रखी 
पुरानी अलमारी की ओर
जानते हो क्यों?

उस संदूकची में 
आज भी रखे हैं 
वह पुराने खत
जिनमें मौजूद हैं 
कुछ प्रश्न, जो पूछे थे
तुमने कभी मुझे
और उस अलमारी में 
कैद हैं तुम्हारे प्रश्नों के 
मेरे अनकहे जवाब..



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News Digital India 18

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