दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये


जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में

प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये!
 -सतीश सक्सेना 
साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !


दर्द सारे ही भुलाकर, हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये!

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये!

तोड़ सीमायें सड़ी, संकीर्ण मन विस्तृत करें
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये!

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !




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News Digital India 18

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