राजकिशोर : वे लिखकर बेहतर दुनिया बना रहे थे


वरिष्‍ठ पत्रकार Raj Kishore नहीं रहे। मैं उनके लिखे का प्रशंसक था। आम बोलचाल की भाषा में सरलता-सहजता से वे जिस तरह गंभीर बात लिख जाते थे, वह उन्‍हें विशिष्‍ट बनाता था।

- संजीव सिन्हा  
श्री राजकिशोर जी के हिंदी के अनेक समाचार-पत्रों में नियमित स्‍तंभ थे। दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला आदि में उनके नियमित लेख छपते थे। मैं बड़े ही चाव से पढ़ता था। कारण कि वे गांधी और लोहिया के विचारों के आलोक में लेखन करते थे और मैं भी इन दोनों महापुरुषों के विचार से अनुप्राणित होता हूं।

वे साम्‍यवाद के आलोचक थे   
वे संघ विचार परिवार के कट्टर आलोचक थे। एकांगी विरोध करते थे। हिंदुत्‍व के घोर विराेधी थे। इस कारण, उनसे अनेक बार बहसें भी हुईं।

एक संस्‍मरण है। एक बार मित्र पंकज कुमार झा के साथ साहित्‍य अकादमी जाना हुआ था। अकादमी में राजकिशोरजी मिल गए। वे सिगरेट पी रहे थे। मुझे ठीक नहीं लगा। कारण कि वे अपने लेखों में अकसर नैतिकता-सामाजिकता का प्रश्‍न उठाते रहते थे। 

मैंने उनसे कह ही दिया कि राजकिशोरजी, आपके लिखे का जबरदस्‍त प्रशंसक हूं, लेकिन आप सार्वजिनक जगह, वह भी साहित्‍य अकादमी भवन, पर सिगरेट पी रहे हैं। लेकिन यह उनका बड़प्‍पन था कि वे नाराज नहीं हुए। बड़े मन का परिचय देते हुए स्‍वीकार किया कि आदत का शिकार हूं और तुरंत उन्‍होंने उसे फेंक दिया।

उनके नहीं रहने की जब आज खबर मिली तो पता चला कि फेफड़ों के संक्रमण के चलते उनका देहांत हुआ। वे लिखकर बेहतर दुनिया बना रहे थे। उनसे कुछ मुद्दों पर वैचारिक मतभेद थे लेकिन उनका लिखा अधिकांशत: प्रेरित करता था। प्रख्‍यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह यहां तक कहते थे कि राजकिशोर हिंदी के एकमात्र पत्रकार हैं।

हिंदी के ऐसे श्रेष्‍ठ पत्रकार को विनम्र श्रद्धांजलि!

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc