'विकास' का राग बीजेपी ने छेड़ा, किया विपक्ष के सांसदों ने?



''जब आधे से अधिक बीजेपी सांसदों ने कोई काम ही नहीं किया 

तो क्या यह मानें कि विकास विपक्ष के सांसदों ने किया? जैसा कि खुद 

बीजेपी के आंतरिक सर्वे में यह बात सामने आई है.''





सल में यह चौंकाने वाली बात बीजेपी के अपने आंतरिक सर्वे में सामने आई है. 2014 में बीजेपी ने जिन 282 सीटों पर धमाके दार जीत दर्ज की और सरकार बनाई थी, उसके बाद से ही विकास के दावे भी जबरदस्त किये जा रहे थे, लेकिन आज सरकार के 4 साल बाद स्थिति वैसी नहीं है. बहुत कुछ बदल गया है. लगातार उप चुनावों में मिली हार के बाद बीजेपी के सांसदों की संख्या अपने दम पर बहुमत के आंकड़े 272 से नीचे गिर गई. अब बीजेपी के अपने आंतरिक सर्वे में यह बात सामने आई है कि बीजेपी के आधे से कहीं अधिक 152 सांसदों ने काम ठीक से नहीं किया. ऐसे में जब बीजेपी सांसदों ने काम ही नहीं किया तो सरकार द्वारा किये जा रहे विकास के दावे को क्या मानें, फिर क्या यह विकास विपक्ष के सांसदों ने किया?

महाभारत 2019 पर भास्कर में प्रकाशित एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बीजेपी के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पार्टी ने 2014 में जीती गई सभी सीटों पर आंतरिक सर्वे कराया. सर्वे गुजरात चुनाव के ठीक पहले आ गया था, लेकिन सर्वे में स्थिति ख़राब होने की बजह से इसे आगे नहीं बढ़ाया गया. रिपोर्ट में भास्कर ने दावा किया है कि यह रिपोर्ट उसने देखी है. 

रिपोर्ट के अनुसार अब स्थिति संभालने बीजेपी द्वारा नाराजगी वाली सीटों पर काम किया जा रहा है. साथ ही मोदी अमित शाह की जोड़ी ने टिकिट वितरण में कड़े मापदण्ड अपनाने का मन बना लिया है. इसमें 75 साल वाले फार्मूले को अपनाने पर प्रमुखता से विचार किया जा रहा है. यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी के वरिष्ठ जीतने वाले नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, सुमित्रा महाजन, वी सी खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी जैसे नेता प्रभावित होंगे. 

सत्ता विरोधी लहर के कारण, जहाँ नहीं जीते अब वहां प्रयास 
रिपोर्ट के मुताबिक़ सत्ता विरोधी लहर के कारण पार्टी की अब उन चार राज्यों पर निगाह है, जहाँ 2014 में 105 में से वह केवल 6 सीट हासिल कर सकी थी. इन राज्यों में शामिल हैं ओड़ीसा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल. ये वो क्षेत्र हैं जहाँ मोदी लहर के बाबजूद 105 में से बीजेपी को मात्र 6 सीटें मिलीं थीं. अब पार्टी का सोच है कि वह यहाँ से 80 सीटें लाना चाहती है. 

रिपोर्ट के अनुसार पार्टी इन राज्यों में सीटें बढ़ाने पर अमित शाह पिछले 3 माह से काम कर रहे हैं. वहीं प्रधानमंत्री मोदी खुद भी अपना क्षेत्र वाराणसी बदल सकते हैं या फिर उन्हें साथ में पुरी से उतारा जा सकता है. पार्टी का मानना है कि ओड़ीसा में बीजू जनता दल के नवीन पटनायक, आंध्रप्रदेश में टीडीपी के चंद्राबाबु नायडू, तेलंगाना में टीआरएस के के. चंद्रशेखर राव और पश्चिम बंगाल में टीएमसी की ममता बनर्जी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है, जिसे बीजेपी के पक्ष में भुनाया जा सकता है. 

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