'सैल्यूट' नहीं करना था, तो वहां और गए क्यों थे?




''पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नागपुर में भाषण के कुछ घंटे भी नहीं बीते थे कि 

भाजपा-संघ के डर्टीट्रिक्स विभाग ने जोर-शोर से काम शुरू करते हुए सोशल मीडिया 

पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की संघ नेताओं की तरह सैल्यूट करती तस्वीर 

वायरल कर दी. अब लोग कह रहे हैं यह तो होना ही था. 'सैल्यूट' नहीं करना था, 

तो वहां और गए क्यों थे? 

बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने तो पहले ही कह दिया था, यही सब होना है.'' 



@ राकेश तिवारी 


पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति के बाद से ही उनसे कहीं अधिक चर्चा उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी को लेकर हो रही है. अब कार्यक्रम हो चुका है, तब भी  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने क्या कहा या संघ प्रमुख मोहन भगवत ने क्या कहा लोगों ने क्या सुना, समझा से अधिक बात इस पर हो रही है कि क्या अब पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बीजेपी में आ जायेंगे? उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी को बीजेपी से लड़ाया जाएगा. यहाँ तक कि यह खबर भी बन गई कि प्रणब मुखर्जी चाहते हैं शर्मिष्ठा मालदा (पश्चिम बंगाल) से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े. 

असली और नकली, यह तो होना ही था 

हालांकि यह दांव बीजेपी के लिए ही महंगा साबित होने जा रहा है, क्योंकि शर्मिष्ठा ने साफ़ कह दिया है कि उन्हें पता था यही सब होने वाला है. सो उनकी तैयारी भी पूरी थी. उन्होंने लगे हाथ न केवल इसे सिरे से खारिज किया, बल्कि यहाँ तक कह डाला कि मुझे जिसका डर था और जिसके लिए मैंने अपने पिता को चेताया था, वही हो रहा है. अभी कुछ घंटे भी नहीं बीते हैं और भाजपा-संघ के डर्टी ट्रिक्स विभाग ने जोर-शोर से काम शुरू कर दिया है. असल में नागपुर में भाषण के कुछ ही घंटे बाद सोशल मीडिया पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की संघ नेताओं की तरह सैल्यूट करती तस्वीर जारी हो गई. शर्मिष्ठा ने इसे भाजपा की करतूत बताया है. वहीं लोग कह रहे हैं यह तो होना ही था, 'सैल्यूट' नहीं करना था, तो वहां और गए क्यों थे? अनावश्यक देश की प्रमुख समस्याओं से ध्यान भटकता है.



बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पहले ही कह दिया था 'तस्वीरें बनी रहेंगी और उन्हें  झूठे बयानों के साथ प्रचारित किया जाएगा'

उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम के एक दिन पहले उनकी बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पिता के कार्यक्रम में शामिल होने के फैसले को अनुचित ठहराया था. शर्मिष्ठा ने कहा था कि संघ मुख्यालय में उनका संबोधन भुला दिया जाएगा, लेकिन इससे जुड़ीं तस्वीरें बनी रहेंगी. और उन्हें  झूठे बयानों के साथ प्रचारित किया जाएगा. उन्होंने कहा था कि संघ का न्योता स्वीकार कर पूर्व राष्ट्रपति ने भाजपा और संघ को झूठी कहानियां गढ़ने का मौका दे दिया है. 

शर्मिष्ठा ने ट्वीट कर कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति जल्द ही समझ जाएंगे कि भाजपा की गंदी चालबाजी कैसे काम करती है. संघ कभी नहीं मानेगा कि अपने (प्रणब के) भाषण में आप इसके विचारों की सराहना कर रहे हैं. भाजपा में शामिल होने की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए शर्मिष्ठा ने कहा कि वह कांग्रेस छोड़ने के बजाय राजनीति से संन्यास लेना पसंद करेंगी. कांग्रेस छोड़ने की अफवाह को बकवास बताते हुए शर्मिष्ठा ने ट्वीट किया है, ‘पहाड़ों में खूबसूरत सूर्यास्त का आनंद लेने के बीच भाजपा में मेरे शामिल होने की अटकलें मेरे लिए ‘टॉरपिडो’ की तरह हैं. इस दुनिया में कहीं भी सुकून और शांति नहीं मिल सकती है क्या?'



प्रणव ने आरएसएस के ही मंच से उसके फैलाए राष्ट्रवाद को फर्जी बताया
अब जो हो रहा है, उसके बाद माना जा रहा है पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी वहां जाकर गलती की ऐसा महसूस कर रहे होंगे. लेकिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस बात से संतुष्ट भी होंगे कि उन्होंने वहां जाकर आरएसएस के ही मंच से उसके फैलाए राष्ट्रवाद के भ्रम को तार तार किया. 

कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भाषण का निचोड़ था कि तुम्हारा राष्ट्रवाद फर्जी है. उन्होंने वहां इतिहास की नज़ीरें पेश करते हुए कहा कि असली राष्ट्रवाद सभी धर्मों, प्रांतों, भाषाओं और जातियों को साथ लेकर चलने में है. इस प्रकार उन्होंने संघ से अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि तुम्हारा राष्ट्रवाद फर्जी है. उन्होंने ये भी बताया कि असली राष्ट्रवाद क्या है. श्री मुखर्जी ने कहा कि भारत खुला हुआ देश रहा है. भारत के दरवाजे पहले से सबके लिए खुले हुए हैं. 

सार यही है कि इस सबके बाद संघ भी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को बुलाकर अच्छा महसूस नहीं कर रहा होगा. जैसा कि संघ प्रमुख मोहन भगवत को कहना पड़ा कुछ बदल नहीं रहा, संघ, संघ ही रहेगा.  




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