नैनपुर में टेंडर घोटाला हाइकोर्ट पहुंचा, दोषियों पर होगी बड़ी करवाई




''नगर पालिका नैनपुर में मुख्य नगरपालिका अधिकारी, उपयंत्री और नगर पालिका अध्यक्ष ने अपनी पसंद के ठेकेदारों के लिए टेंडर मात्र 1 मिनट से आधे घंटे के लिए खोला, न ही टेंडर की किसी अख़बार में विज्ञप्ति निकाली गयी, टेंडर होने की किसी को कानो-कान खबर तक नहीं हुई और बड़ी ही चतुराई से नगर पालिका अधिकारियों के द्वारा अपने चेहते ठेकेदार को टेंडर दे दिया गया.''

मंडला नैनपुर से सुजीत प्रजापति की रिपोर्ट  


मंण्डला जिले के नैनपुर नगर पालिका का बहुचर्चित टेंडर घोटाला अब हाईकोर्ट पहुँच गया है. पूरे मध्यप्रदेश में सबसे पहले ये घोटाला नैनपुर नगरपालिका में पकड़ाया.  नगर पालिका नैनपुर में मुख्य नगरपालिका अधिकारी, उपयंत्री और नगर पालिका अध्यक्ष ने अपनी पसंद के ठेकेदारों के लिए टेंडर मात्र 1 मिनट से आधे घंटे के लिए खोला, न ही टेंडर की किसी अख़बार में विज्ञप्ति निकाली गयी, टेंडर होने की किसी को कानो-कान खबर तक नहीं हुई और बड़ी ही चतुराई से नगर पालिका अधिकारियों के द्वारा अपने चेहते ठेकेदार को टेंडर दे दिया गया. टेंडर भरने के सभी नियमों को दर किनार करते हुए नगर पालिका ने न ही ठेकेदार से जीएसटी नंबर लिया, न ही पैनकार्ड. देखें वीडियो शशांक चौरसिया शिकायतकर्ता का इस बारे में क्या कहना है



चर्चा में है कि मामला हाईकोर्ट पहुँचने के साथ ही अब अधिकारी घोटाले के साक्ष्य छुपाने में लग गए हैं. देर रात तक साइट से छेड़छाड़ कर डाटा हटाया गया जा रहा है. मध्यप्रदेश रोड कॉर्पोरेशन हो या मैप इट हो, हर जगह अधिकारियों के द्वारा सबूत मिटाये जा रहे हैं. साइड से टेंडर हटाया जा रहा है. टेंडर का समय बदलकर साइट ब्लॉक करके  अधिकारियों और नेताओं ने अपने पसंद के ठेकेदार को टेंडर दे दिया और टेंडर मैनेज किया गया. 

सबसे पहले नगर पालिका नैनपुर ने 2016 में टेंडर घोटाला किया. लगातार दो साल तक टेंडर घोटाला करने के बाद नगरपालिका अधिकारी और ठेकेदारों के द्वारा की गई करोड़ो की ठगी अब पकड़ में आई है. इस घोटाले को पिछले परिषद की अध्यक्ष तथा नई परिषद के अध्यक्ष का संरक्षण भी अधिकारियों और ठेकेदारों को मिलता रहा. यह देखिये नगर पालिका अध्यक्ष नरेश चंद्रोल का गैर जिम्मेदाराना बयान-


अब अधिकारी नेता और ठेकेदार मामले को ठंडे बस्ते में डाल रहे है.  यूँ तो अधिकारी, नेता और ठेकेदार बहुत प्रसन्न मन से भ्रस्टाचार कर रहे थे, लेकिन जब से टेंडर घोटाला पकड़ में आया है, सबकी रातों की नींद उड़ गई है. अधिकारी हर हफ्ते नैनपुर से भोपाल और जबलपुर के चक्कर काट रहे हैं और टेंडर घोटाले को दबाने मे लगे हैं. चाहे जबलपुर में बैठे नगरीय प्रशासन विभाग के मुख्य अभियंता हों या नैनपुर नगरपालिका में बैठे मुख्य नगर पालिका अधिकारी, उपयंत्री हों सब मामले की लीपापोती में लगे हैं. 

मामले की बात हो तो कोई भी अधिकारी नेता और ठेकेदार कुछ भी बात करने से बच रहा है. शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उसने मुख्य अभियन्ता प्रदीप कुमार मिश्रा नगरीय प्रशासन विभाग जबलपुर को टेलीफोन के माध्यम से इसकी शिकायत की तो अधिकारी ने मामले की जांच की और जब जांच में बड़ा घोटाला सामने आया तो मामले को दबाने में लग गए. 

शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि इसके बाद से उसका मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया गया. हर जगह शिकायतकर्ता ने जब शिकायत की और कहीं से इंसाफ नहीं मिलता दिखा तो उसने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, लोकायुक्त तथा उच्चन्यायालय की शरण ली तथा सारे साक्ष्य जमा कर दिए. अब दिनों-दिन अधिकारियों नेताओं और ठेकेदारों में बढ़ती बैचेनी बताती है कि टेंडर घोटाला कुछ ज्यादा ही बड़ा है और इसके तार कहीं लम्बी दूर तक फैले हुए हैं. 

(डिजीटल न्यूज़ सर्विस नेटवर्क)  



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