कैसे लोकप्रिय हैं मोदी कि भीड़ बढ़ाने स्कूली बच्चे जुटाये गये -नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह





लोग बोले क्या सरकारी स्कूल इसलिए ही चलाये जा रहे हैं 
''जब मोदी लोकप्रिय नेता हैं तो उनकी सभा में भीड़ जुटाने के लिए स्कूल-कॉलेज और कोचिंग सेंटर बंद क्यों करवाने पड़े? यह सवाल नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने उठाया है.''






मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि इंदौर में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्कूल बंद करवाकर मोदी जी की सभा में जाने का निर्देश बताता है कि शिक्षा के साथ भाजपा सरकार किस तरह खिलवाड़ करती है. उन्होंने कहा कि इस निर्देश से इस आरोप की भी पुष्टि होती है कि मोदी जी की सभा में प्रायोजित भीड़ आती है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसके पूर्व अमरकंटक में भी मोदी जी की सभा में लोगों को इकट्ठा करने के लिए शासकीय धन से पूरे प्रदेश के लोगों को ले जाया गया था. 

नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि निजी बस संचालकों पर दबाव डालकर सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए बस ले ली जाती है, और बाद में उसका भुगतान भी नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि इंदौर में जब आरटीओ ने प्रधानमंत्री मोदी की इंदौर सभा के लिए भीड़ जुटाने हेतु बस के लिए निजी ऑपरेटरों से कहा तो उन्होंने पहले का 1 करोड़ 63 लाख का बकाया भुगतान मांगा. यह बकाया राशि अंत्योद्य मेला, राष्ट्रीय पोषण मिशन, पंचायत राज सम्मेलन, शैव महोत्सव और गुरूकुल सम्मेलन में भीड़ को लाने के लिए जो बसें ली गई थी, उनका है, जिसका भुगतान आज तक नहीं हुआ. श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को तत्काल हस्तक्षेप कर बकायादारों को पेमेंट करवाने और उनकी सभा के लिए बच्चों की पढ़ाई बंद कर भीड़ जुटाने के निर्देश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को देना चाहिए.
इंदौर स्टेडियम, रही सही कसर ऊपर वाले ने पानी बरसा कर पूरी कर दी. 



कहते तो यह हैं कि प्रदेश में कोई एन्टीइनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) नहीं है, लेकिन फिर आज लोकप्रिय बताये जाने वाले नेता प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर स्कूली बच्चे क्यों बटोरे गए. कहा जा रहा है मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को प्रधानमंत्री मोदी पर भी भरोसा नहीं रहा, सरकार कतई आश्वस्त नहीं थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में इंदौर एवं आसपास के गरीब, ग्रामीण, किसान और इंदौर शहर के सभ्य नागरिक उपस्थित होंगे, सो भीड़ जुटाने के लिए सभी सरकारी स्कूलों को आदेशित किया गया. आदेश में कहा गया कि वो अपने अपने स्कूल से 50-50 छात्र अनिवार्य रूप से भेजें. प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने मोदी की सभा के लिए बसें उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया तो स्कूली बसें अधिग्रहित कर ली गईं, और स्कूलों की जबरन छुट्टी कर दी गई.



यूनिवर्सिटी को दिया गया था 20 हजार स्टूडेंट्स का टारगेट
हर स्कूल से 50-50 छात्रों के अलावा देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को 20 हजार स्टूडेंट्स लाने का टारगेट दिया गया था. इससे पहले इंदौर के सभी विधायकों से कहा गया था कि वो 5-5 हजार लोगों को अपनी विधानसभा से लाएं, इस पर आम चर्चा में है कि उन्होंने साफ मना कर दिया. 

मामले पर सोशल मीडिया पर श्री Anil Sharma  जी ने लिखा है 'ये तो पुराना रिवाज है, सरकारी स्कूल के बच्चे इसीलिये होते हैं.' 

(डिजीटल न्यूज़ सर्विस नेटवर्क)   




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