विधानसभा का कलंकित और शर्मनाक सत्र


नेता प्रतिपक्ष की मां को हक दिलाने के लिए विधानसभा में नेताओं में चर्चा! यह लोकतंत्र के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत और मानव समुदाय को कलंकित करने वाली घटना है कि आज के दौर में नेता विधानसभा में प्रदेश, देश का विकास, गरीबों के लिए योजनाओं पर चर्चा नहीं कर रहे हैं, बल्कि चर्चा इस बात पर कर रहे हैं कि नेता प्रतिपक्ष की मां को उनका हक कैसे मिलेगा?  



- नितिन दुवे    

विधानसभा लोकसभा में इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि गरीबों के लिए, महिलाओं के लिए, युवाओं के लिए कौन सी ऐसी योजनाएं बनें, जिनसे उनका जीवन स्तर ऊंचा हो, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि आज इस बात पर चर्चा हो रही है कि नेता प्रतिपक्ष की मां को उनका हक कैसे मिले?यह देश का दुर्भाग्य नहीं है तो और क्या है कि विधानसभा में आज इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है. प्रदेश के मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष पर आरोप लगा रहे हैं कि पहले अपनी मां को हक दें, उनको घर में रखें, इलाज कराएं. 

जवाब में नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि CM साहब अपनी पार्टी का ख्याल रखें, मुझे बदनाम करने की कोशिश नहीं करें. सवाल यही है कि आपकी इस बयानबाजी में जनता कहां है? विकास कहां है?

क्या यही विकास है? यह विकास नहीं, बल्कि देश का दुर्भाग्य है. यह विकास नहीं, प्रदेश का दुर्भाग्य है. जब नेता मानसिक रूप से ही विकसित नहीं हैं, तो वह प्रदेश में किस स्तर की योजनाएं बनाएंगे? किस तरह का विकास करेंगे? यह तो भगवान ही भरोसे है.

आप जानते हैं कि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की मां ने घरेलू विवाद और प्रॉपर्टी में अपना हक लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जिस दिन से यह दरवाजा खटखटाया है, उसी दिन से प्रदेश की राजनीति विकास योजनाएं, सुरक्षा, सबसे हटकर एक विशेष मां और परिवार पर केंद्रित हो गई है. मैं समझता हूँ कि यह कलंकित और शर्मनाक सत्र कहा जाएगा. 

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