मुझे बस तुम्हारे मरने से नफरत है, नफरत...



''कई लोग बोल चुके हैं, फेंगशुई के अनुसार 'गोल्डफिश' का मरना अच्छा होता है. वो अपने साथ तुम्हारी मुसीबत लेकर जाती हैं. यदि यह सच है तो भी मैं यही कहूंगी, मुझे तुम्हारे मरने से नफरत है.'' 




@श्रुति अग्रवाल इंदौर 






पिछले तीन दिनों से लगातार मेरी सुनहरी मछलियां मर रही हैं, तीन दिन में दो मछलियां मर चुकी हैं. मुझे उनके मरने से नफरत है. कई लोग बोल चुके हैं, फेंगशुई के अनुसार 'गोल्डफिश' का मरना अच्छा होता है. वो अपने साथ तुम्हारी मुसीबत लेकर जाती हैं. यदि यह सच है तो भी मैं यही कहूंगी, मुझे तुम्हारे मरने से नफरत है. मैं हर मुसीबत सहने को तैयार हूं, लेकिन तुम्हें मरता नहीं देख सकती. जब भी अपने झरने में किसी मछली की तैरती लाश देखती हूं. दिल धक्क हो जाता है. धड़कने साथ छोड़ती लगती हैं, लेकिन मेरा काम तुरंत झरने का पानी बदलना होता है, क्योंकि एक गंदी नहीं, बल्कि मरी मछली पानी को विषैला कर देती है. दूसरी मछलियों में संक्रमण ना फैले, इसलिए पानी बदलना होता है. तुरंत बदलना होता है. रोने या उदास होने में आप वक्त नहीं गंवा सकते. रोएंगे तो और खोएगें. यही तो सिखाया है, मुसीबत के समय रोने की जगह मुसीबत से निपटने में जुट जाओ. टूटो, लेकिन टूटने के बाद फिर से जुड़ने की कोशिश करो.


मुझे आज भी याद है, तीन साल पहले ये बाप-बेटे सुनहरी मछली का एक जोड़ा ले आए थे. खूब गुस्सा हुई थी मैं. इससे पहले-सालों पहले एक बार ब्लू फिश-किसिंग फिश का जोड़ा पाला था. स्वीट औऱ हार्ट नाम रखा था. चार महीनों बाद स्वीट मर गई. हार्ट को दुकान में वापस लौटा कर आई. तब से मन ही नहीं किया, इन्हें छोटे से फिश पॉट में डालने का. गुस्सा होने के बाद पता चला कि यह मेहमान हफ्ते-दस दिन पहले ही घर आ चुके हैं. चुपके से झरने में डाल दिए गए. अब नाराज होकर भी क्या किया जाए, दाना-पानी का इंतजाम सर आ चुका था. मैंने झरने को साफ करना और इन्हें दो टाइम दाना देना अपने ऊपर ले लिया. 



तीन महीने बीते थे. एक दिन पानी बदलने जा रही थी. खूब सारे सुनहरे छोटे-छोटे बच्चे दिखे. दिल बाग-बाग हो गया. पहली बार मछलियों के सुनहरे लाल-पीले देखे थे. मैं खुश होती जा रही थी. महीने दर महीने मछलियों की संख्या बढ़ती जा रही थी. अब ये सौ से ज्यादा हो गईं. पहले कुछ लोग ले गए. सबके घर पनप ही ना पाईं तो अब देना बंद कर दिया. अब हर बार ये बच्चे होते हैं, दो-तीन बचते हैं बाकी दूसरी मछलियां खा जाती हैं. ये सब कब होता है पता नहीं चलता, इसलिए महसूस नहीं होता. जीवनचक्र मानकर मंजूर कर लिया है, उनकी लाश भी दिखती नहीं. इसलिए आने-जाने का पता ही नहीं चलता. 

लेकिन जब भी बड़ी मछली को निष्प्राण पानी की सतह पर तैरते देखती हूं, सांस अटक जाती है. सुनो मेरी सारी एंजल फिश.... मेरे लिए सच परियां ही हो तुम. मुझे हर तकलीफ, हर मुसीबत सहना मंजूर, उनसे लड़ना मंजूर है. कान खोल कर सुन लो, मुझे बस तुम्हारे मरने से नफरत है, नफरत....

कई लोग बोल चुके हैं, फेंगशुई के अनुसार 'गोल्डफिश' का मरना अच्छा होता है. वो अपने साथ तुम्हारी मुसीबत लेकर जाती हैं. यदि यह सच है तो भी मैं यही कहूंगी, मुझे तुम्हारे मरने से नफरत है. वो तो अभी पांच-छह मछलियां फिर खुशखबरी देने वाली हैं. मुझे पता है... स्वीट-हार्ट का भी इसलिए लिखा, क्योंकि उनको ग्लॉस के गोल बॉउल में रखने की गलती की थी. इन्हें स्क्वेयर की जरूरत होती है. 

दूसरी बार जब इन्हें घर लाया गया तो इनके बारे में सारी जानकारियां जुटा ली थी...2 गोल्ड फिश का कुनबा इतना बढ़ गया है कि हमने गिनना छोड़ दिया. अभी तो मैं फिशटैंक में कैमरा लगाने का सोच रही थी. पता तो चले. सुबह देखा. 4-5 गर्भवती मछलियां आराम से तैर रही थीं. छोटी और बड़ी बाकी की मछलियां फिश टैंक में एक तरफ आपस में सिमटी सी थीं. कुछ तो खिंचड़ी पक रही है... सबके बीच. मेरे एक-एक पेड़-पौधे-पंछी ( जो आवारा है सिर्फ दाना-पानी के लिए आते हैं) डॉग्स क्या करेंगे, ये पता करने की बुरी सी आदत है. 




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