न हो रोजा तो इफ्तारी न कीजै, विधायक जी अदाकारी न कीजै..





''तेरे दर पे ये बात हो मौला
अपनी भी कुछ बिसात हो मौला
और जो मैं गा दूं भजन के टुकड़े
सुनने वालों को नाद हो मौला'' 

ख़ास चिंता सुनने वालों के लिए करने वाले, आम आदमी के बारे में, उसकी समस्याओं को समझने वाले उन पर अपना अच्छा सोच रखने वाले उत्तरप्रदेश कैडर से आईएएस डॉ. अखिलेश मिश्रा इन दिनों पीलीभीत में कलेक्टर हैं. कलेक्टरी के साथ साथ कवितायें भी करते हैं, और वह भी खूब धारदार. उनका मानना है कि कविता अपने आप ह्रदय से निकलती है. श्री मिश्रा कहते हैं अंतर्मन में जो आप सोचते हैं, लेकिन अनुशासन के कारण कह नहीं पाते, वही बात वायपास इस टूल 'कविता' के माध्यम से आप कह सकते हैं. 

आईएएस डॉ. अखिलेश मिश्रा ने व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करते हुए कई धारदार रचनाएं पेश कीं हैं. इनकी रचना- 
''रोटी खरीद लाया है ईमान बेचकर, 
घर में बचा था बस यही सामान बेचकर 
गुमटी उठाकर ले गई नगरपालिका, 
आया था शहर गांव की दुकान बेचकर 

चिट्ठी तो लिख दिया है पता क्या लिखे बिटिया, 
बाबुल ने शादी कर दिया मकान बेचकर'' 

सुनकर निश्चय ही आप भी झूम उठेंगे और वही बात दोहरा देंगे, जो एक बार उत्तरप्रदेश में गोरखपुर से डॉक्टर वजाहत करीम ने कही कि इन जैसे 8-10 डीएम जिस सूबे में हो जाएँ, उस सूबे का कल्याण हो जाए. अब यह अलग बात है कि उत्तरप्रदेश में इस तरह के अधिकारियों की संख्या नहीं बढ़ रही और हालात ठीक नहीं हो रहे. लेकिन हाँ, कलेक्टर डॉ. अखिलेश मिश्रा जिस जिले पीलीभीत में हैं, वहां के लोग बेहद लकी हैं. जिले का नाम अनावश्यक अखबारों में नहीं आता. 



कलेक्टर डॉ. अखिलेश मिश्रा की आवाज धर्म पर भी उठने में हिचकिचाई नहीं है. एक समय था जब कबीर ने लिख दिया था- 
''कंकड़ पत्थर जोड़ के मस्जिद लई बनाय 
ता चढ़ मुल्ला बाग़ दे क्या बहरा हुआ खुदा 
पत्थर पूजें हरि मिलें तो मैं पूजूं पहाड़ 
ता से तो चाकी भली पीस खाय संसार''
आज इस पर कुछ भी लिखने के पहले कई सौ बार सोच कर भी कलम रूठ जाती है. ऐसे में कलेक्टर डॉ. अखिलेश मिश्रा सिस्टम की पोल खोलते हुए बोलते हैं- 
''रवायत टूटती है, टूट जाए 
न हो रोजा तो इफ्तारी न कीजै 
अमां टोपी, कभी केसरिया पगड़ी 
विधायक जी अदाकारी न कीजै..'' 

कलेक्टर डॉ. अखिलेश मिश्रा पर बात करते हुए डॉक्टर वजाहत करीम, जिनका मुशायरे में जाना पहचाना नाम है. और उनका मानना है कि आज समाज में जो बुराईयाँ पनप रही हैं या पैदा हो रही हैं उनके पीछे अच्छे लोगों की चुप्पी प्रमुख बजह है. उनका कहना है ऐसा नहीं है कि अच्छे लोगों की तादाद कम है, अच्छे लोगों की तादाद बहुत है, पर वो बोलते नहीं. दुसरी ओर बुरे लोग हैं कम, पर ज़्यादा ज़ोर देकर बोलते हैं, इसलिए अपना दबदबा बना लेते हैं. अच्छे लोग हिम्मत नहीं कर पाते, वर्ना दुनिया में सबसे मज़बूत कोई चीज़ है तो वो प्यार है. 
खैर आप अखिलेश जी को सुनिए- 
- चित्रांश     



पिछले दिनों कलेक्टर डॉ. अखिलेश मिश्रा से 'गाँव कनेक्शन' ने बात की. जहाँ उन्होंने अपने बारे में, कविता कैसे बनती है, जैसी बातें शेयर कीं. वह यहाँ देखिये- 






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