मजा आया न डीएम साहब! हो गये निलम्बित, क्या सोचा था महंत खुश होगा, शबासी देगा..





योगी के रामराज्य में सब कुछ ठीक ठीक नहीं चल रहा

''आम चर्चा है कि गोंडा के डीएम जेबी सिंह को खाद्यान्न की कालाबाज़ारी 

न करवाने के लिए सज़ा मिली है. गोंडा में खाद्यान्न घोटाले के लिए 

बाकायदा एक गिरोहबंद आपराधिक संगठन के तौर पर सक्रिय है. 

छोटे-बड़े अफसर को चुटकियों में मसल डालने की क्षमता वाले इस माफिया 

ने आज जिलाधिकारी को निलम्‍बन की हालत तक पहुंचा दिया.''



@ सत्येन्द्र नाथ श्रीवास्तव


सुबह खबर आई यूपी में योगी ने खाद्यान घोटाले पर कठोर कार्यवाही की. 2 डीएम सस्पेंड कर दिए. जहाँ कुछ लोग योगी को महान बताने लग गए हैं, वहीं आम चर्चा यह भी है कि योगी सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. आम चर्चा है कि गोंडा के डीएम जितेंद्र बहादुर सिंह को खाद्यान्न की कालाबाज़ारी न करवाने के लिए सज़ा मिली है. उनके जिले में खुले बाज़ार में सरकारी राशन बेचे जाने की शिकायत मिली थी. डीएम श्रीसिंह ने इस पर जांच की. और छापा डालकर 9000 बोरी खाद्यान जब्त किया. 

गोंडा में खाद्यान्न घोटाले के लिए बाकायदा एक गिरोहबंद आपराधिक संगठन के तौर पर सक्रिय है. किसी भी छोटे-बड़े अफसर को चुटकियों में मसल डालने की क्षमता वाले इस माफिया ने आज जिलाधिकारी को निलम्‍बन की हालत तक पहुंचा दिया. बीजेपी के कुछ विधायकों और नेताओं ने भी योगी को शिकायत की थी कि ये डीएम खाद्यानो की कालाबाजारी पर छापा डाल रहा है, गोदाम सील कर रहा है, रासुका लगा रहा है. 

गोडा डीएम जितेंद्र बहादुर सिंह ने 27 मई को अयोध्या से सटे वजीरगंज क्षेत्र में एक निजी गोदाम पर छापामारी की थी. इस पूरे दौरान वे खुद गोदाम पर पहुंचे थे. छापेमारी में 8000 से ज्यादा खाद्यान्न के बोरे बरामद किए गए थे. यह छापेमारी के तहत शहर के पास बने एफसीआई के गोदाम के साथ ही साथ झंझरी ब्लॉक के गोदाम में भी भारी गड़बड़ियां पाई गई थीं.

सूत्र बताते हैं कि गोंडा में खाद्यान्न घोटाले बाकायदा एक गिरोहबंद आपराधिक संगठन के तौर पर सक्रिय है. पिछले दशक यहां हुई सीबीआई की छापामारी में भी कई बड़े लोगों के नाम शामिल हुए थे, लेकिन इसके बावजूद यहां खाद्यान्न घोटाले लगातार बढ़ते ही गए. और इसे संचालित करने में बाकायदा माफिया गिरोह बन चुका है. किसी भी छोटे-बड़े अफसर को चुटकियों में मसल डालने की क्षमता वाले इस माफियाओं ने आज जिलाधिकारी को निलम्‍बन की हालत तक पहुंचा दिया. बात योगी तक गई आदेश आया डी एम निलम्बित. मजा आया न डीएम साहब हो गये निलम्बित, क्या सोचा था महंत खुश होगा, शबासी देगा....

27 मई के छापे में जिस ट्रक को सुबह साढ़े दस बजे पकड़ कर थाने तक पहुंचा कर, और उसे कागजातों में दर्ज किया गया था, उसी ट्रक की झंझरी ब्लॉक के मार्केटिंग इंस्पेक्टर भारत सिंह ने दोपहर 12 बजे अपने गोदाम में आमद दर्ज कराई थी. यानी डीएम की कार्रवाई के डेढ़ घंटों के बाद. यानी यह पूरा का पूरा मामला गजब धोखाधड़ी का चल रहा था. इस घोटाले में सोहेल अहमद और धर्मप्रकाश नामक कुछ बड़े खाद्यान्न व्यापारियों का नाम सामने आया है, जो कोटे का खाद्यान्न के घोटाले में जुटे थे.

यहां के सरकारी खाद्यान्न माफियागिरी कर रहे हैं. लोगों ने 8000 खाद्यान्न को गोदान से निकाल कर सरकारी खरीद केंद्र पर पहुंचाने का धंधा शुरू किया था, लेकिन इसके पहले यह समझ लीजिए कि सरकारी गोदाम में रखा अनाज कुरियर लोग बुरा बदलकर निकालते थे और फिर सरकारी खरीद से की गई इन खाद्यान्न की बोरियों को दोबारा सरकार के हाथों बेच दिया जाता था, है ना बड़ा रत्ना घोटाला.

इस छापामारी के बाद डीएम जितेंद्र बहादुर सिंह ने 4 जून को इन माफियाओं के खिलाफ रासुका लगाने की संस्तुति कर दी थी, लेकिन शासन ने उस पर कार्यवाही करने के बजाए उल्टे जिलाधिकारी को ही निलंबित कर टांग लिया. अंतिम खबर मिलने तक जितेंद्र सिंह अपना शहर छोड़ कर लखनऊ रवाना हो चुके हैं. उधर खबर है जिले के डीएसओ राजीव कुमार सिंह और डिप्टी आरएमओ अजय विक्रम सिंह के साथ ही साथ मार्केटिंग इंस्पेक्टर भारत सिंह के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी हो चुका है. 




खाद्यान्न की कालाबाज़ारी न करवाने के लिए सज़ा मिली ?  
दुसरी तरफ देखें तो डीएम को सस्पेंड किया गया है, उन पर बीजेपी के कुछ विधायकों और नेताओं ने शिकायत की थी कि ये डीएम खाद्यानो की कालाबाजारी नहीं होने दे रहा है. छापा डाल रहा है गोदाम सील कर रहा है, रासुका लगा रहा है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक सीनियर अफ़सर से इसकी जांच कराई. जांच में आरोप सही पाए गये. गोडा डीएम वाकई छापा डाल रहा था, गोदाम सील कर रहा था. आम चर्चा है कि गोंडा के डीएम जेबी सिंह को खाद्यान्न की कालाबाज़ारी न करवाने के लिए सज़ा मिली है. उनके जिले में खुले बाज़ार में सरकारी राशन बेचे जाने की शिकायत मिली थी. जेबी सिह ने इस पर जांच की. जांच में शिकायत सही मिली. छापा डालकर 9000 बोरी खाद्यान जब्त किया. 

गोंडा के डीएम जितेंद्र बहादुर सिंह पीसीएस से प्रमोशन पाकर 2013 में आईएएस अधिकारी बने थे. बीजेपी के कई विधायक और मंत्री योगी सरकार में अफ़सरों की मनमानी के आरोप लगाते रहे हैं कि वे उन्हे खुल कर काम नहीं करने देते. खैर आज लखीमपुर रवाना होने से पहले योगी आदित्यनाथ ने जेबी सिंह को सस्पेंड कर दिया. दुसरे फतेहपुर के डीएम कुमार प्रशांत को सरकारी जमीन किसी निजी व्यक्ति को गलत तरीके से आवंटित करने के आरोप में सस्पेंड किया गया है. 

इस लेबल पर हो रही है गड़बड़ी. योगी के प्रमुख सचिव पर 25 लाख घूस मांगने का आरोप

लगातार गड़बड़ हो रही है यहाँ    
हाल ही क्षेत्र के बंधवा के कोदई बगिया में एक निजी गोदाम में बड़े पैमाने पर हो रहे सरकारी खाद्यान्न घोटाले का पर्दाफाश हुआ. विधायक तरबगज और उप-जिलाधिकारी के नेतृत्व में तमाम अधिकारियों की मौजूदगी में पड़े छापे में हजारों बोरी सरकारी खाद्यान्न बरामद हुआ. लेकिन आरोपी अपने साथियों समेत भाग निकला. 

विधायक तरबगंज प्रेमनरायन पाण्डेय, उपजिलाधिकारी सौरभ भट्ट, सीओ तरबगंज कृष्णचन्द्र सिंह, तहसीलदार श्याम कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी राजीव कुमार, डिप्टी आरएम अजय विक्रम के नेतृत्व में टीम ने जब खाद्यान्न गोदाम पर छापा मारा तो वहां हजारों बोरी चावल जिस पर जगाधरी हरियाणा का टैग लगा हुआ था, के साथ भारी मात्रा में खुले और बोरियो में पैक गेंहू जिन पर क्रय केंद्र साधन सहकारी समिति कर्मा सांचे से छापा जा रहा था, गोदाम में ही एक ट्रक से गेहूं उतारा जा रहा था. मौके से बोरा सिलने की दो मशीन, दो कम्प्यूटराइज्ड तौल कांटे, भारी मात्रा में सरकारी सप्लाई के खाली बोरे के साथ पैकिंग व लदान के अन्य उपकरण भी मौके पर मिले.  



अधिकारीयों के ट्रान्सफर में भी यह भारी गड़बड़ी कही जायेगी   
इससे पहले प्रदेश सरकार ने खनन विभाग के निदेशक डॉ. बलकार सिंह को हटाकर बस्ती का जिलाधिकारी बनाया था, उन्होंने जब 15 दिन तक बस्ती के डीएम का काम नहीं संभाला तब फिर डॉ. राजशेखर को बस्ती का डीएम बनाया, डॉ. बलकार सिंह को एक बार फिर निदेशक खनन के पद पर तैनात किया गया, लेकिन कल ही उनको इस पद से हटा दिया गया. प्रदेश सरकार ने 25 मई को उनका तबादला विशेष सचिव एवं निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म से बस्ती के डीएम पद पर कर दिया था. 

बलकार सिंह बस्ती जाने को तैयार नहीं हुए. वह पश्चिम यूपी के जिले में तैनाती चाह रहे थे. उनका बस्ती डीएम पद पर तबादला मंगलवार को निरस्त कर दिया गया. इसके साथ ही उन्हें विशेष सचिव एवं निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में बने रहने के आदेश दिए. इस आदेश के जारी होने के 24 घंटे के भीतर ही सरकार ने उन्हें खनन विभाग से हटा दिया. अब उन्हें निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण बनाया गया है. मतलब समझ में आया हम तो लूटेंगे.. 

सांसद, विधायक भी असंतुष्ट, सीएम कहते हैं 'राजनीति छोड़ दो'   
देवरिया के बरहज से बीजेपी विधायक सुरेश तिवारी के बयान का उल्लेख करना भी यहाँ जरूरी होगा. उन्होंने  मीडिया से बात करते हुए सीएम योगी पर आरोप लगाए हैं कि सीएम योगी आदित्यनाथ विधायक की नहीं सुनते. अगर किसी अधिकारी की शिकायत करो, तो सीएम कहते हैं कि राजनीति छोड़ दो. इस दौरान विधायक ने देवरिया के डीएम सुजीत कुमार और सीडीओ राजेश त्यागी पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने राज्य मंत्री जयप्रकाश निषाद को भी जमकर लताड़ा.

बीजेपी विधायक ने कहा कि रुद्रपुर कस्बे में कई स्थानों पर अवैध शराब का धंधा चलता है. इस शराब के धंधे को राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद का लड़का और उनके गुर्गे चलाते हैं. अभी एक हफ्ते पहले ही मंत्री के गांव लक्ष्मीपुर के बीएसएनल भवन से 52 लाख की शराब पकड़ी गई थी, जिसे पकड़ने वाले दरोगा को मंत्री के दबाव में लाइन हाज़िर कर दिया गया. सुरेश तिवारी ने बताया कि मैंने डीएम को छह बार फोन किया, लेकिन एक बार भी फोन नहीं उठा. सीडीओ भी सुनवाई नहीं कर रहे. अभी दो दिन पहले 35 अधिकारियों का ट्रांसफर हुआ है, लेकिन देवरिया के भ्रष्ट डीएम और सीडीओ का तबादला नहीं हुआ. डीएम के बारे में मैंने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा. लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. मुख्यमंत्री से शिकायत करने पर कहा जाता है कि राजनीति छोड़ दो.

कुछ अन्य कारणों को लेकर भी उत्तरप्रदेश में बीजेपी के अपने ही कई सांसदों और विधायकों में पार्टी से नाराज़गी बढ़ती नज़र जा रही है. बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले, छोटेलाल और अशोक दोहरे दलित उत्पीड़न के मामले पर सीएम योगी को कटघरे में खड़ा कर चुके हैं. कुछ सांसदों ओर विधायकों ने सीएम योगी की शिकायत करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी तक को चिट्ठियां लिखी हैं. विधायकों और सांसदों के अलावा सरकार के ही कबीना मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी योगी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं.




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