आपका फिटनेस चैलेंज उन्हें रोमांचित नहीं करता




''कौन नहीं जानता कि प्रधानमंत्री जी को जिस पंचतत्व वाली घास में चलने का सुख हासिल है, वह देश के आम लोगों को नहीं हासिल. जिस देश में किसानों की साँसें दैवीय आपदाओं में अटकी हों और नौजवानों के कानों में दिन रात बेरोजगारी सांय-सांय  करती हो, फिटनेस चैलेंज का मुहावरा उन्हें नहीं रोमांचित करता.''




@लोकमित्र गौतम 



ज सुबह 13 जून 2018 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, “सुबह की एक्सरसाइज के कुछ पल शेयर कर रहा हूं. योगा के अलावा मैं एक ऐसे ट्रैक पर चलता हूं, जो कुदरत के पांच तत्वों से प्रेरित है- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश. ये बहुत ताज़ा करने वाली एक्सरसाइज़ है.’’ प्रधानमंत्री मोदी ने इस वीडियो को शेयर करने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और टेबल टेनिस प्लेयर मनिका बत्रा को फ़िटनेस चैलेंज दिया.

दिनों-दिन बीमार हो रही भारतीय राजनीति में ‘फिटनेस चैलेंज’ एक नया मुहावरा है. यूँ तो इसकी अभिव्यक्ति का दायरा बहुत बड़ा है, लेकिन इस मुहावरे का जो तात्कालिक संदेश है, वह यह है कि बहुत हो गयी गंभीरता, बहुत हो गयी अवाम की चिंता, अब आओ जरा राजनीति को रोमांच से जोड़ें. इसलिए सारे असली चैलेंज को भूल कर रंग-बिरंगे और सेलेबल चैलेंज ढूंढें. 

हम समझते हैं यह फिटनेस चैलेंज इन्हीं में से एक है. नहीं तो भला कौन नहीं जानता कि प्रधानमंत्री जी को जिस पंचतत्व वाली घास में चलने का सुख हासिल है, वह देश के आम लोगों को नहीं हासिल. जिस देश में किसानों की साँसें दैवीय आपदाओं में अटकी हों और नौजवानों के कानों में दिन रात बेरोजगारी सांय-सांय  करती हो, फिटनेस चैलेंज का मुहावरा उन्हें नहीं रोमांचित करता.
... और यह कांग्रेस की जन की बात 







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