भीड़ में वह शक्श अकेला था, कोई न सुन सका हँसी के पीछे का दर्द





''भय्युजी चले गए. सुसाइड नोट छोड़ गए हैं, लेकिन फिर भी सवाल उठ रहे हैं. बजह है कि एक ऐसा शक्श जो दूसरों को जीवन से लड़ने की संघर्ष की प्रेरणा देता था, आखिर कैसे इतना टूट सकता है.'' 

सुसाइड नोट में पारिवारिक कलह का उल्लेख किया गया है. इसमें कोई शक नहीं कि पारिवारिक कलह एक बड़ी बजह होती है. और इस बजह से कई घर टूटे हैं. बर्बाद हुए हैं. लेकिन आत्म ह्त्या तक... दुनिया को शान्ति का पाठ पढ़ाने वाला शक्श खुद इतना अशांत था, यह न कोई समझ सका, और न वह किसी को बता सके. समस्या यह ज्यादा है. 

लोग अपने आप में गुम से हो गए हैं. उनके पास कोई एक व्यक्ति ऐसा नहीं था, जिसे वह अपनी समस्या बता पाते. मनोवैज्ञानिक बताते हैं असल में ऐसी स्थिति में बहुत ख़ास मित्र 'दो जिस्म एक जान' जैसा होना जरूरी होता है. तो इस स्थिति से बचा जा सकता है. वैसे तो सात जन्म का बंधन वाले ही आपस में ऐसे होना चाहिए, लेकिन अब वह बात नहीं है. उसकी कई बजहें हैं. 


मनोवैज्ञानिक बताते हैं आत्महत्या के पीछे सबसे बड़ी बजह होती है सब ओर से निराशा, सब ओर से हताश हो जाना. कहीं कोई एक छोटी सी भी उम्मीद की कोई किरण का नहीं दिखना. तकलीफ की बात यह है कि इतनी बड़ी भीड़ में वह शक्श अकेला था. भय्युजी के साथ भी यही हुआ. हालांकि उनके एक करीबी को गिरफ्तार किया गया है. कैसा करीबी था वह, अब परतें तो बहुत होंगी और खुलेंगी भी . 

@ चित्रांश   





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