समंदर की गीली रेत पर, एक अकेला, तन्हा सा..


समंदर की गीली रेत पर
एक अकेला, तन्हा सा
मेरे पाँव का निशान....

सर उठा कर देखता है
पीछे मुड़ कर
दूर तक
ढूंढता है वो
जाना पहचाना
दूसरा निशान

समंदर का लहरें,
दौड़ी आती हैं देखकर, 
पर ठिठक जाती है
मेरे पाँव छूने से पहले
घूरती हैं मुझे
सवालिया नज़रों से,
पूछती है वही
जो उसकी रेत ने पूछा,

फिर अजीब 
Accusing सी शक्ल बनाकर
वापिस लौट जाती हैं

मेरे पास खुद कोई जवाब नहीं,
नहीं है न.....

@ Pushpindra Chagti Bhandari 

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News Digital India 18

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