राजधानी भोपाल में मासूम भांजे बेंच रहे अखबार



'पेपर ले लो साब, 2 रूपये का है, ले लो साब', यह कहते हुए भोपाल में ये छोटे छोटे बच्चे किसी भी चौराहे पर आपको मिल जायेंगे. यदि आप भोपाल में हैं और कार यूज करते हैं तो कहा जा सकता है कि निश्चित ही इन बच्चों से आप रूबरू हुए होंगे. लेकिन ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं. आज भोपाल के जागरूक, एक जिम्मेदार नागरिक श्री राकेश भार्गव जी की नजर इन पर पड़ गई तो उन्होंने क्लिक किया और Bhopal City Information Portal पर बात रख दी. जिस पर अब लोग कई बातें कर रहे हैं. और अब यह बड़ी खबर बन गई है. 

डिजिटल इंडिया 18 ऑनलाइन    

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री अपने को बच्चों के मामा कहते हैं, पर राजधानी भोपाल में ही यह हाल है. छोटे छोटे उनके भांजे पेपर बेंच रहे हैं. राजधानी भोपाल में सभी मौसमों में चाहे तेज गर्मी हो, बारिश हो या कड़ाके की ठण्ड ये बच्चे कुछ पैसे के लिए अख़बार के साथ अपने काम में लगे रहते देखे जा सकते हैं. 

श्री राकेश भार्गव जी, जिन्होंने आबाज उठाई
बाल श्रम को अपराध बताने वाला मीडिया खुद भी इस अपराध में शामिल दिख रहा है. देखें किस प्रकार बच्चा अखबार के नाम की टी-शर्ट पहने हुए है और न्यूज पेपर बेच रहा है. भोपाल में बड़े नेता, मंत्री, अधिकारी और पुलिस भी यह सब देख कर केवल मूक दर्शक का रोल करते हैं. 

सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है यह आबाज उठेगी तो सरकार केवल उनके द्वारा समाचार पत्र बेचने पर प्रतिबंध लगाएगी, लेकिन बच्चों के लिए कुछ भी नहीं करेगी. ऐसे में आर्थिक परेशानियों में होंगे तो बच्चे आगे भी कुछ भी करेंगे ही. 


कुछ ख़ास प्रतिक्रियायें    

श्री Ashwani Beohar जी ने लिखा है 'ये एक्सप्लायटेशन केवल "प्रदेश टुडे" द्वारा किया जा रहा है, इसका भरपूर विरोध होना चाहिए और "प्रदेश टुडे" के विरुद्ध कठोर कार्यवाही होनी चाहिए.' 
उन्होंने यह भी कहा है 'इसी फील्ड में अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाये हमारे विदिशा के सत्यार्थी जी इसे क्यों अनदेखा कर रहे हैं?'

सरकार उनके लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर सकती तो रोक भी कैसे सकेगी, पर सवाल खड़ा किया है श्री Prathvi Dev Singh जी ने. उनका कहना है क्या आपको सचमुच लगता है कि अगर वे यह काम नहीं करते हैं तो वे घर बैठेंगे, नहीं तो वे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तापमान क्या है?


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